इमाम पर मस्जिद में बच्ची से रेप का आरोप लगा तो लोगों ने ज्वाला गुट्टा को क्यों घेर लिया?

ज्वाला गुट्टा. बैटमिंटन खिलाड़ी हैं. अर्जुन अवॉर्डी. सोशल मीडिया पर खासी एक्टिव रहती हैं. 2 जून को भी इन्होंने एक ट्वीट किया. जिसने सबका ध्यान खींचा. इसमें लिखा था,

वो सारे लोग जो मुझे एक मस्जिद में नाबालिग के रेप की घटना में टैग कर रहे हैं. उन्हें बता दूं कि मैंने हमेशा रेप और महिलाओं पर होने वाली हिंसा का विरोध किया है. लेकिन ये लोग मुझे अलग ही नीयत से टैग कर रहे हैं. उन्हें मैं बता दूं कि मैं एक नास्तिक हूं. नास्तिक.

किस घटना के बारे में बात कर रही हैं ज्वाला गुट्टा?

दिल्ली के हर्ष विहार इलाके की ज़ेबा मस्जिद के एक मौलाना पर मस्जिद के अंदर 12 साल की बच्ची से रेप का आरोप लगा. 30 मई को स्थानीय लोगों के मस्जिद के बाहर प्रदर्शन कर आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की. पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज से मौलाना की फोटो निकाली और उसकी तलाश शुरू की. मौलाना को गाज़ियाबाद के लोनी इलाके से गिरफ्तार किया गया.

गिरफ्तारी के बाद पता चला कि आरोपी मौलाना का नाम इलियास है और वो कई मस्जिदों में इमाम का काम करता है. आरोपी की उम्र 48 बताई गई और ये भी सामने आया कि वो शादीशुदा और दो बच्चों का बाप है. आरोपी के खिलाफ IPC की रेप से जुड़ी धाराओं और POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ.

30 मई को घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर गुस्सा देखने को मिला. 12 साल की बच्ची से रेप की घटना पर कई लोगों ने नाराज़गी जताई. पर एक धड़ा ऐसा था जिनका फोकस बच्ची के रेप की घटना से ज्यादा इस बात पर था कि कथित रेप मस्जिद के अंदर हुआ. ऐसे लोग एक अलग तरह का कैम्पेन सोशल मीडिया पर चलाने लगे. हिंदू बनाम मुस्लिम वाला कैम्पेन. कुछ सेलेब्स को टैग करके ये बताने का कैम्पेन कि उन्होंने मस्जिद में हुए गैंगरेप के बारे में कुछ कहा नहीं, कुछ लिखा नहीं. जबकि कठुआ और उन्नाव गैंगरेप मामलों पर तो खूब लिख रहे थे. ज्वाला गुट्टा को भी इसी बात को लेकर टारगेट किया गया.

‘ये कैसी नास्तिक, जो ईद मनाती है?’

अप्रैल 2018 में कठुआ में आठ साल की बच्ची के गैंगरेप और मर्डर का मामला सामने आया था. कठुआ गैंगरेप मामला न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में चर्चित हुआ था. उस केस को लेकर विदेशी मीडिया में भारत की खूब किरकिरी हुई थी. तब जम्मू कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की सरकार थी. उन पर भी हिंदुओं और भारत को बदनाम करने के आरोप लगे थे. ज्वाला गुट्टा इस मुद्दे पर लगातार ट्वीट कर रही थीं. आठ साल की मासूम को न्याय दिलाने की मांग कर रही थीं. विक्टिम या आरोपियों के धर्म का जिक्र किए बिना. लेकिन उन पर भारत के अपमान के आरोप लगने लगे.

एक ट्वीट में ज्वाला ने लिखा था,

“हम दुनिया के सबसे महान दर्शक बन गए हैं. एक आठ साल की बच्ची को कई दिनों तक टॉर्चर किया गया, उसका रेप किया गया और हम उसके लिए खड़े नहीं हो पा रहे हैं. ये क्यों मायने रखना चाहिए कि वो किस धर्म की थी? आज खड़े नहीं हुए, तो कब होंगे?”

एक यूज़र ने लिखा,

“आपके व्यूज़ ज़रूरी हैं. पर कुछ लोगों की गलती के लिए आप देश की 130 करोड़ जनता का अपमान कर रही हैं.”

इस पर ज्वाला ने जवाब दिया,

“आपको हमारे देश में मौजूद रेपिस्ट्स की वजह से अपमानित महसूस करना चाहिए. न कि उन औरतों से जो रेप के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रही हैं.”

 

Jwala Gutta पर देश की 130 करोड़ जनता के अपमान के आरोप लगे.

ज्वाला ने ये भी लिखा था कि हालात ऐसे हो गए हैं कि पब्लिक फिगर्स इस बारे में लिखने से बच रहे हैं. रेप की आलोचना करने से बच रहे हैं. क्योंकि ऐसा करने पर ट्रोल्स और भक्त उन्हें एंटी नैशनल बता देंगे. कठुआ गैंगरेप पर जारी विवाद के बीच ज्वाला गुट्टा पर हिंदू विरोधी होने के आरोप लगे थे. तब ज्वाला ने ट्वीट किया था कि वो कई बार बता चुकी हैं कि वो नास्तिक हैं. उन्होंने लिखा था,

“लोगों को एक नया फ्रेज़ मिल गया है. सलेक्टिव आउटरेज. मैं कई बार बोल चुकी हूं कि मैं रेप के खिलाफ बोलती हूं, जेंडर, जाति, धर्म से मुझे फर्क नहीं पड़ता. सारे कथित भक्त एक बार कान खोलकर सुन लो. मैं एक नास्तिक हूं. मैं केवल मानवता पर विश्वास रखती हूं. “

अब जब दिल्ली में मस्जिद के अंदर बच्ची से रेप का मामला सामने आया तो लोग इसी बात को लेकर उन पर निशाना साधने लगे. उनके दिवाली, ईद मनाने पर कमेंट करने लगे. ट्रोल्स का फोकस उनके दिवाली मनाने पर कम और ईद मनाने पर ज्यादा रहा. लोग उनकी शादी की तस्वीरें शेयर करके बताने लगे कि ये एक एथिस्ट हैं और हिंदू रिवाज़ से शादी कर रही हैं. क्योंकि उनको सुंदर दिखना है. लिखने लगे कि गजब की नास्तिकता है. जब मंदिर में गैंगरेप हुआ तो खूब बोलीं और मस्जिद में हुआ तो एक ट्वीट तक नहीं किया. कुछ ट्वीट्स देखिए.

 

ज्वाला गुट्टा को हिपोक्रिट बताया गया. लिखा गया कि जब मंदिर में रेप होता है तो वो पूछती हैं कि भक्त कहां हैं. और मस्जिद में रेप होता है तो खुद को नास्तिक बताकर अलग हो लेती हैं.

ज्वाला पर सवाल उठाने वालों में ब्लू टिक धारी भी शामिल थे. ज्वाला के एथिस्ट वाले ट्वीट के जवाब में शेफाली वैद्य ने लिखा,

“तो ट्वीट करने के लिए आपको टैग होने की ज़रूरत थी? रिएक्ट करने के लिए पहले टाइम नहीं मिला? क्यों? कठुआ केस में तो पूछ रही थीं कि भक्त कहां हैं? अब एथिस्ट कहां हैं? गहरी नींद में? क्योंकि आरोपी एक इमाम है?”

जवाब में ज्वाला गुट्टा ने कठुआ केस और अभी के मस्जिद वाले रेप केस का अंतर बताते हुए लिखा,

“कठुआ केस में रेपिस्ट्स को पूरा सपोर्ट मिल रहा था. उनके समर्थन में रैलियां निकाली जा रही थीं. इस घटना में आरोपी पकड़ लिया गया है. हम इंफ्लुएंसर्स को ट्रोल्स के स्तर पर नहीं गिरना चाहिए. और किसी महिला के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.”

जवाब में शेफाली वैद्य ने बताया कि रैली आरोपियों के समर्थन में नहीं. बल्कि CBI जांच की मांग के लिए हुई थी. हालांकि, अप्रैल, 2018 की तमाम मीडिया रिपोर्ट्स आपको मिल जाएंगी. जिनमें लिखा हुआ है कि आरोपियों के समर्थन में रैली निकाली गई थी. और उसमें बीजेपी के दो विधायक भी शामिल हुए थे.

*

देखिए, मामला क्या था और कहां चला गया! ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी मासूम के प्रति रेप जैसी हिंसा की खबर का इस्तेमाल लोगों ने अपना एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए किया हो. हम अक्सर सोचते हैं कि हर जघन्य रेप केस के बाद देश में हंगामा होता है. सब न्याय की मांग करते हैं. फिर भी रेप रुकते क्यों नहीं?

उसकी एक वजह शायद यही है कि हमारे देश के ताकतवर लोगों को रेप पर एजेंडा ठेलने और पॉलिटिक्स करने से फुर्सत नहीं मिलती. तो महिला और बाल सुरक्षा के असल मुद्दों पर असल बात करने का वक़्त कहां से मिलेगा?


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