उज्जैन प्रशासन ने अतिक्रमण हटाया, इसे देश विरोधी नारे लगाने वालों के खिलाफ़ कार्रवाई बतायी गयी

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उज्जैन में एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर ‘पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’ के नारे लगाए जाने की बात सामने आयी थी. इससे जुड़े कुछ वीडियोज़ सोशल मीडिया पर शेयर किये गए थे. लेकिन ऑल्ट न्यूज़ ने अपनी जांच में पाया कि वायरल वीडियो में ‘पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’ नहीं बल्कि ‘काज़ी साहब ज़िदाबाद’ के नारे लगाए गए थे. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और 23 लोगों के खिलाफ़ शिकायत भी दर्ज की है.

इस दौरान, सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है. वीडियो में बुलडोज़र से बस्ती उजाड़ी जाती दिख रही है. दावा किया जा रहा है कि उज्जैन में जिन लोगों ने कथित रूप से ‘पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’ के नारे लगाए थे, उन लोगों की बस्ती को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खाली करवा दिया. ट्विटर यूज़र डॉ. ऋचा राजपूत ने भी ये वीडियो ट्वीट कर ऐसा ही दावा किया. आर्टिकल लिखे जाने तक इस वीडियो को 46 हज़ार बार देखा जा चुका है. (आर्काइव लिंक)

ट्विटर हैन्डल ‘@Himmu06147024’ ने भी ये वीडियो इसी दावे के साथ पोस्ट किया. (ट्वीट का आर्काइव लिंक)

फ़ेसबुक पेज ‘बकलोली’ ने भी ये वीडियो इसी दावे के साथ पोस्ट किया. आर्टिकल लिखे जाने तक इस वीडियो को 5,400 व्यूज़ मिले. (आर्काइव लिंक)

फ़ेसबुक से लेकर ट्विटर पर ये वीडियो इसी दावे के साथ वायरल है. व्हाट्सऐप पर भी इस वीडियो की सच्चाई जानने के लिए ऑल्ट न्यूज़ के हेल्पलाइन नंबर पर रीक्वेस्ट आयी हैं.

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फ़ैक्ट-चेक

वीडियो देखने पर ऑल्ट न्यूज़ को संदेह हुआ कि शायद ये वीडियो अवैध अतिक्रमण हटाए जाने का हो सकता है. इस आधार पर की-वर्ड्स सर्च करने पर हमें इस घटना से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं. 27 अगस्त की ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, उज्जैन में करोड़ों की ज़मीन पर बनी अवैध दुकानों को ज़िला प्रशासन ने हटाया था. इस कारवाई में करीब 200 दुकानें ध्वस्त की गयी थीं. ये कार्रवाई उज्जैन स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत की गयी थी. इस आर्टिकल में साफ़-तौर पर बताया गया है कि अवैध कब्ज़ा हटाने की कार्रवाई हाईकोर्ट एक आदेश पर की गई थी.

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रिपोर्ट के मुताबिक,”स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर को भी 10 गुना बड़ा करने की योजना पर काम चल रहा है. जिसमें महाकाल मार्ग में आने वाले तमाम अवैध मकानों और दुकानों को ध्वस्त करने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया था. अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था कि जो लोग अतिक्रमण वाले इलाके में बसे हुए हैं, पहले उन्हें सूचना दी जाए और मकान खाली करने के लिए 45 दिन का वक्त दिया जाए”. इसके चलते, ज़िला प्रशासन ने अवैध कब्जा करने वाले लोगों को 45 दिनों पहले नोटिस दी थी. आर्टिकल में लिखा है, “प्रशासन ने पौने दो हेक्टेयर जमीन पर बनी अवैध दुकानों को हटाया. इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपए में है.”

27 अगस्त को एवी न्यूज़ ने इस घटना के बारे में एक रिपोर्ट पब्लिश की थी. इस रिपोर्ट में अतिक्रमण हटाए जाने की तस्वीर भी है.

इसके अलावा, वायरल वीडियो में 1 मिनट 14 सेकंड पर पर प्रशासन के लोगों के पीछे एक होटल दिखता है जिसके बोर्ड पर ‘होटल प्रेसिडेंट’ लिखा है. गूगल मैप पर सर्च करने से मालूम चला कि ये होटल हरि फ़ाटक ब्रिज पर मौजूद है.

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इसके अलावा, उज्जैन में कथित तौर पर ‘पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’ के नारे वाली घटना गीता कॉलोनी में हुई थी. जबकि अतिक्रमण हरि फ़ाटक ब्रिज से हटाया गया था. इन दोनों जगहों के बीच 2 किलोमीटर से ज़्यादा का अंतर है.

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ऑल्ट न्यूज़ ने इस मामले में उज्जैन के एसपी सत्येन्द्र कुमार शुक्ला से भी बात की. उन्होंने बताया, “अतिक्रमण हटाने को लेकर की गई कार्रवाई का देश विरोधी नारे लगाने से कोई संबंध नहीं है. ये दोनों घटनाएं अलग-अलग है. अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नगर निगम के अंतर्गत की गयी थी. पुलिस डिपार्टमेंट ने इस कार्रवाई में अपना सहयोग दिया था.”

कुल मिलाकर, उज्जैन में अतिक्रमण हटाए जाने का वीडियो हाल में उज्जैन में कथित रूप से ‘पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’ के नारे लगाने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का बताकर शेयर किया गया. जैसा कि हमने देखा, इन दोनों घटनाओं में कोई संबंध नहीं है. पहले भी अतिक्रमण हटाए जाने के वीडियोज़ सांप्रदायिक दावे के साथ शेयर किये गये हैं.


काबुल एयरपोर्ट पर मची भगदड़ के नाम पर USA का वीडियो शेयर किया गया :

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