एशेज़ टेस्ट के आखिरी दिन क्या हुआ लोग इंडिया-न्यूज़ीलैंड मैच याद करने लगे!

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एशेज़ टेस्ट सीरीज़. पहले तीन टेस्ट मैच में जिस तरह से ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को पटखनी दी. उससे तो यही लग रहा था कि सीरीज़ में वाइटवॉश देखने को मिलेगा. लेकिन नए साल की शुरुआत इंग्लैंड क्रिकेट टीम के लिए बहुत अच्छी रही है. सिडनी में खेले गए सीरीज़ के चौथे टेस्ट मैच के आखिरी दिन मेहमान अंग्रेज़ों ने ऑस्ट्रेलिया के मुंह से जीत छीन ली. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच सिडनी टेस्ट मैच के आखिरी दिन आखिरी पलों का खेल इतना रोमांचक हुआ कि आखिरी गेंद तक टेस्ट मैच में नतीज़े का इंतज़ार रहा. और आखिर में ये टेस्ट ड्रॉ पर खत्म हुआ.

चलिए आपको बताते हैं आखिर पूरी कहानी क्या है?

मैच में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 388 रन का लक्ष्य दिया. चौथे दिन का खेल जब खत्म हुआ तो इंग्लैंड ने बिना कोई विकेट गंवाए 30 रन बना भी लिए थे. यानि के आखिरी दिन इंग्लैंड को जीतने के लिए 358 रन, वहीं ऑस्ट्रेलिया को जीतने के लिए 10 विकेट की ज़रूरत थी.

टेस्ट मैच का आखिरी दिन, दिन के पहले सेशन में लंच से पहले इंग्लैंड ने तीन विकेट खो दिए. ऑस्ट्रेलिया ने दिन की अच्छी शुरुआत की. इसके बाद अगले सेशन में इंग्लैंड ने वापसी की. चाय के समय तक इंग्लैंड ने सिर्फ एक और विकेट खोया. यानि कुल चार विकेट. पहले दो सेशन में दोनों टीमों ने एक-एक सेशन पर अपना कब्ज़ा जमाया.

हालांकि इंग्लैंड की यहां से टेस्ट मैच जीतने की उम्मीद लगभग खत्म हो गई थी. जबकि आखिरी सेशन में ऑस्ट्रेलिया को ये टेस्ट मैच जीतने के लिए छह विकेट चटकाने थे. बस यहीं से आखिरी सेशन का रोमांच शुरू होता है. दिन के दूसरे सेशन में बढ़िया बैटिंग करके गए स्टोक्स को आखिरी सेशन में जैसे ही नैथन लायन ने आउट किया. ऑस्ट्रेलिया को जीत की खुशबू आ गई. क्योंकि अब भी खेल में लगभग 27 ओवर का खेल बाकी था.

इसके ठीक बाद जोस बटलर भी 11 के स्कोर पर कप्तान कमिंस की गेंद पर आउट हो गए. और देखते ही देखते अगली दो गेंदों में कमिंस ने मार्क वुड को भी वापसी का रास्ता दिखा दिया.

बस इस ओवर से तो ऑस्ट्रेलिया का अटैक और भी तेज़ हो गया. क्योंकि इंग्लैंड के छह बल्लेबाज़ लौट चुके थे और अब स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ के तौर पर सिर्फ जोनी बेयरस्टो एक एंड पर डटे हुए थे. दिन का खेल खत्म होने में लगभग सवा घंटे का खेल बचा था और ऑस्ट्रेलिया को जीत की खुशबू आने लगी. क्योंकि उन्हें सिर्फ तीन विकेट और चाहिए थे. ऑस्ट्रेलिया किसी भी पल सीरीज़ में 4-0 हो सकता था.

लेकिन यहां से इंग्लैंड के पुछल्ले बल्लेबाज़ों ने वो संघर्ष दिखाया जिसे इंग्लैंड की युवा पीढ़ी को आने वाले सालों में दिखाया जाएगा. मार्क वुड के विकेट के बाद जैक लीच क्रीज़ पर आए. लीच ने आते ही ऐसी अटैकिंग बैटिंग की कि अब सारा प्रेशर ऑस्ट्रेलिया पर आ गया. उन्होंने बेयरस्टो के साथ मिलकर ना सिर्फ दिन का समय काटा बल्कि 38 गेंदों की एक अहम साझेदारी भी निभाई.

हालांकि इंग्लैंड की पारी के 92वें ओवर में बेयरस्टो का सब्र भी टूट गया और वो बोलेंड की गेंद पर क्रीज़ पर 156 मिनट बिताने के बाद लौट गए. अब ऑस्ट्रेलिया जीत से सिर्फ दो गेंद दूर था. दो अच्छी गेंद पर दो बल्लेबाज़ आउट और ऑस्ट्रेलिया की जीत. लेकिन यहां से भी मेज़बानों के लिए काम आसान नहीं हुआ. क्योंकि इस बार जैक लीच के साथ स्टुअर्ट ब्रॉड ने मोर्चा संभाल लिया.

उन्होंने लीच के साथ 52 गेंद की पार्टनरशिप की और कोई विकेट नहीं गिरने दिया. इन दोनों की बल्लेबाज़ी से ऑस्ट्रेलियाई टीम की घबराहट बढ़ती जा रही थी. क्योंकि अब रौशनी खराब हो रही थी और ऑस्ट्रेलिया को जीत दूर लगने लगी. यहां से मैच में खराब रौशनी का खेल भी शुरू हो गया. लाइट्स मीटर निकल आए और तेज़ गेंदबाज़ों के गेंदबाज़ी करने वाली परिस्थिति नहीं रही. मैदानी अंपायर्स ने ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ कप्तान पेट कमिंस को साफ कह दिया कि अब सिर्फ स्पिनर्स से गेंदबाज़ी करवाई जा सकती है. यानि तेज़ गेंदबाज़ बोलिंग नहीं करेंगे.

लेकिन इस बदलाव ने ही ऑस्ट्रेलिया को जीत की किरण दे दी. बॉलिंग में चेंज हुआ और पारी के 100वें ओवर में जैक लीच का संघर्ष दम ले गया. 77 मिनट तक जी भरकर खेले जैक लीच को स्टीवन स्मिथ ने डेविड वॉर्नर के हाथों कैच आउट करवा दिया. अब ऑस्ट्रेलिया के लिए जीत सिर्फ एक विकेट दूर थी. क्रीज़ पर थे जिमी एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड. लेकिन ऑस्ट्रेलिया इस आखिरी जोड़ी को नहीं तोड़ सका. इंग्लैंड की पारी का 102वां ओवर फेंका गया और दिन का खेल खत्म होने की घोषणा कर दी गई.
इस तरह से इंग्लैंड के बल्लेबाज़ को बेमिसाल संघर्ष से ये टेस्ट मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ.

कई जानकार इस बेमिसाल टेस्ट मैच को देखने के बाद इस टेस्ट की तुलना 2021 में सिडनी टेस्ट में भारत के मैच से कर रहे हैं. तब भी भारतीय टीम के पुछल्ले क्रम के बल्लेबाज़ों ने ऐसा संघर्ष दिखाकर ऑस्ट्रेलिया से सिडनी में टेस्ट मैच बचाया था. जबकि कई जानकार इस मैच की तुलना हाल में ही भारत-न्यूज़ीलैंड टेस्ट मैच के कानपुर टेस्ट से भी कर रहे हैं. जहां पर रचिन रविन्द्र ने बेहतरीन बल्लेबाज़ी कर भारत को मैच नहीं जीतने दिया.


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