कोविड में आंतों के अंदर क्यों जम रहे हैं खून के थक्के?

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो भी सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछ लें. लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

कोविड में खून के थक्के जमने का काफ़ी ख़तरा रहता है. चाहे पहली वेव रही हो या दूसरी, कई ऐसे केस देखे गए जहां लोगों के ब्रेन और दिल में खून के थक्के जम गए. जिसके कारण उन्हें स्ट्रोक और हार्ट अटैक आया. अब इस साल दिल और ब्रेन के अलावा आंतों में भी खून के थक्के जमने की ख़बरें आ रही हैं. इसे कहा जा रहा है इंटेस्टिनल अटैक. मुंबई में लगातार इसके मामले देखे जा रहे हैं. NDTV के मुताबिक, ऐसा 16 से 30 प्रतिशत लोगों में देखा जा रहा है. इन लोगों में सांस लेने की इतनी शिकायत नहीं होती जितनी पेट से जुड़ी समस्याएं होती हैं. तो आख़िर क्यों होता है इंटेस्टिनल अटैक, ये हमने पूछा एक्सपर्ट से. पर उससे पहले से ये समझ लेते हैं कि कोविड में शरीर के अंदर खून के थक्के क्यों जमने लगते हैं?

कोविड में क्यों जमते हैं खून के थक्के?

ये हमें बताया डॉक्टर दीपक ने.

डॉक्टर दीपक शुक्ला, एमडी, गीतांजलि मेडिकल कॉलेज, उदयपुर

-ये एक ऐसा वायरस है जिसकी आदत है बीमारी के दौरान खून के थक्के जमाने की.

-SARS, MERS जैसे वायरस के दौरान भी खून के थक्के जमने की ख़बरें आई थीं.

-ये वायरस अंगों में बहुत ज़्यादा सूजन पैदा करता है.

-संक्रमण के कारण खून की वेसेल्स में चोट आ जाती है.

-चोट के कारण वहां खून के छोटे-छोटे थक्के जमना शुरू हो जाते हैं उसको ठीक करने के लिए.

-लेकिन खून तो बह रहा होता है.

-इसलिए ये थक्के अपनी जगह से बहकर दूसरी जगह जाकर जमने लगते हैं. इसलिए हार्ट अटैक और स्ट्रोक का ख़तरा होता है.

आंतों में क्यों जम रहे हैं खून के थक्के?

-ऐसा पहले भी देखा गया था. ऐसा नहीं है कि इंटेस्टिनल अटैक इस वेव में देखा गया है.

-पिछली वेव में कम मरीज़ कोरोना संक्रमित हुए थे.

-पर हार्ट अटैक, स्ट्रोक पहले भी हो रहे थे.

-इस वेव में मरीज़ों की संख्या ज़्यादा है. थक्के जमने के केसेस इसलिए ज़्यादा हैं.

-खून के थक्के छोटी-छोटी नलियों में फंस जाते हैं.

-नसों में फंस जाने के कारण जिस अंग पर असर पड़ता है उसमें दिक्कत आनी शुरू हो जाती है.

-क्योंकि सबसे ज़्यादा ब्लड सप्लाई ब्रेन में चाहिए होती है, इसलिए थक्के ब्रेन में जाकर जम जाते थे.

-हार्ट में जम जाते थे.

What is the blood clotting disorder the AstraZeneca vaccine has been linked to? | Gavi, the Vaccine Alliance
ये एक ऐसा वायरस है जिसकी आदत है बीमारी के दौरान खून के थक्के जमाने की

-इस वायरस के कारण अलग-अलग शरीर के हिस्सों में अब खून के थक्के जम रहे हैं.

-पहले भी आंत ब्लॉक हो जाती थीं.

-पेट फूल जाता था और दूसरी परेशानियां शुरू हो जाती थीं.

इंटेस्टिनल अटैक से शरीर को क्या नुकसान पहुंच रहा है?

-खून एक ऐसी चीज़ है जो पोषण पहुंचाता है शरीर के बाकी अंगों को.

-अगर खून नहीं पहुंचेगा तो अंग को पोषण मिलना बंद हो जाएगा.

-अगर पोषण नहीं मिलेगा तो वो अंग मरना शुरू हो जाएगा जिसे गैंग्रीन कहते हैं.

-यही चीज़ ब्रेन और हार्ट में देखी जा रही थी. वहां भी सेल्स मर रहे थे.

-जिसके कारण अचानक मौत हो रही थी.

-लेकिन जब ये आंतों के साथ देखा गया तब खून के थक्के, आंतों को खून पहुंचाने वाली नसों को ब्लॉक कर रहे थे.

-खून आगे जा नहीं पा रहा था जिसके कारण आंतों को पोषण मिलना कम हो गया.

-जब आंतों को पोषण मिलना बंद हो गया तो ये मरना शुरू हो गए. यानी गैंग्रीन होने लगा.

-इसको इस्किमिया बोलते हैं.

-आंतों को मेसेंटेरिक कहते हैं.

-इसे कहते हैं एक्यूट मेसेंटेरिक इस्किमिया और ये पहले भी देखा गया है.

-ब्लड सप्लाई रुकने से आंत का वो हिस्सा ख़त्मी हो गया.

-वो खाने को आगे जाने नहीं देगा और ब्लॉक कर देगा.

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अगर पोषण नहीं मिलेगा तो वो अंग मरना शुरू हो जाएगा जिसे गैंग्रीन कहते हैं

-ब्लॉक करने के कारण खाना अटक जाएगा और पेट का फूलना शुरू हो जाएगा.

-पेट में दर्द, सूजन, खाना खाने में उल्टी होना, मोशन पास न होना.

इलाज

-डॉक्टर खून को पतला करने की दवाइयां देते हैं.

-ये इसलिए दी जाती हैं ताकि खून पतला रहे और जब कहीं थक्का पहुंचे तो वो थक्का निकल पाए, ब्लॉक न करे.

-जब सीवियर कोविड होता है तो इसका इलाज किया जाता है.

-कई तरह के इंजेक्शन दिए जाते हैं, डीडायमर के टेस्ट होते हैं देखने के लिए कि कहीं बढ़ तो नहीं रहा है.

-इसमें लो मॉलिक्यूलर वेट हेपैरिन नाम का इलाज किया जाता है ताकि बीमारी आगे न बढ़े.

-जब थक्के ज़्यादा बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है तब डॉक्टर प्रोफाइल एक्सेस देते हैं

-मतलब इस थक्के को नहीं बनने देना

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ऐसा पहले भी देखा गया था. ऐसा नहीं है कि इंटेस्टिनल अटैक इस वेव में देखा गया है

-थक्के को न बनने देने के लिए खून पतला करने की कुछ दवाइयां आती हैं जैसे हेपैरिन.

-कई लोगों में इलाज के बावजूद थक्के बन जाते हैं.

-जब थक्के बन जाते हैं तो इलाज लंबा चलता है.

-लो मॉलिक्यूलर वेट हेपैरिन नाम के इंजेक्शन दिए जाते हैं.

-उससे खून पतला होता है और ये थक्के टूटते हैं.

-जिन लोगों में डायबिटीज, हाइपरटेंशन या कोई और बीमारी है तो उनमें ये समस्या ज़्यादा बढ़ जाती है.

अगर कोविड के दौरान मरीज का पेट ज़्यादा फूल गया है, स्टूल पास नहीं हो रहा, लगातार फ़ीवर है, पेट दर्द कम नहीं हो रहा तो ज़रूरी है कि तुरंत सीटी एंजियोग्राफी की जाए. इसलिए इन लक्षणों पर नज़र बनाकर रखें.


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