क्या आप भी LinkedIn पर ढूंढ रहे हैं नौकरी तो हा जाएं सावधान, हैकर्स दे रहे लोगों को झांसा

क्या आप भी LinkedIn पर ढूंढ रहे हैं नौकरी तो हा जाएं सावधान, हैकर्स दे रहे लोगों को झांसा

हाइलाइट्स:

  • साइबर अटैकर्स ने LinkedIn पर नौकरी ढूंढने वालों को अपना शिकार बनाया
  • हैकर्स नौकरी चाहने वालों की मजबूरी का फायदा उठा रहे
  • मालवेयर टारगेट डिवाइस में इंस्टॉल हो जाता है तो साइबर क्रिमिनल्स डिवाइस का पूरा नियंत्रण हासिल कर लेते हैं

COVID-19 की दूसरी लहर चल रही है। इससे न केवल लोगों को स्वास्थ्य खराब हो रहा है बल्कि इसने अर्थव्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके तहत कई लोग ऐसे हैं जिन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। वहीं, जिनकी नौकरी चली गई है उनमें से कई LinkedIn पर निर्भर हैं क्योंकि यहां से भी लोगों को नौकरी के विकल्प भी मिल जाते हैं। लेकिन अब LinkedIn भी लोगों के लिए सिक्योर नहीं रह गया है। यहां पर साइबर क्रिमिनल्स काफी एक्टिव हो गए हैं और लोगों को झूठी नौकरी का झांसा देने लगे हैं।

सिक्योरिटी फर्म eSentire के अनुसार, साइबर अटैकर्स के एक समूह ने LinkedIn पर नौकरी ढूंढने वालों को अपना शिकार बनाया है। इस समूह को गोल्डन चिकन्स कहा जा रहा है। ये हैकर्स नौकरी ढूंढने वालों को झांसे में लेने का एक नया तरीका लेकर आए है जिसमें वो यूजर को एक लिंक देते हैं और उन्हें उस पर क्लिक करने के लिए कहते हैं। फिर हैकर्स यूजर्स की डिवाइस में मैलवेयर को इंस्टॉल करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि LinkedIn पर प्रोफेशनल्स को नौकरी के लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जा रहा है जिससे हैकर्स यूजर्स की डिवाइस पर नजर रख सकें।

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उदाहरण के लिए: अगर LinkedIn पर किसी व्यक्ति का जॉब टाइटल सीनियर अकाउंट एग्जीक्यूटिव है तो उसे अंतर्राष्ट्रीय फ्रेट मालिशस जिप फाइल जिसका टाइटल सीनियर अकाउंट एग्जीक्यूटिव- इंटरनेशनल फ्रेट पोजिशन की नौकरी का झांसा दिया जाएगा। जैसे ही यूजर उस फेक जॉब ऑफर के लिंक पर क्लिक करता है तो वह अनजाने में ही अपनी डिवाइस में एक फाइललेस बैकडोर को इंस्टॉल कर लेता है। जब यह डिवाइस में लोड हो जाते हैं तो यह अतिरिक्त मालिशस प्लगइन्स को डाउनलोड कर लेता है और यह यूजर के कम्प्यूटर का हैंड-ऑन एक्सेस हैकर्स को उपलब्ध कराता है।

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जब यह मालवेयर टारगेट डिवाइस में इंस्टॉल हो जाता है तो साइबर क्रिमिनल्स डिवाइस का पूरा नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। हैकर्स डिवाइस का इस्तेमाल कर रैंसमवेयर, बैंकिंग मैलवेयर को डिप्लॉय कर सकते हैं और ज्यादा से ज्यादा डिवाइस करप्ट कर सकते हैं। ESentire के सीनियर डायरेक्टर रॉब मैकलियोड ने पूरी स्थिति को काफी चिंताजनक बताया।

इस मामले को संज्ञान में लेते हुए LinkedIn का कहना है कि वह मैन्युअल रूप से फेक अकाउंट्स या धोखाधड़ी वाले भुगतानों का पता लगाता है और उन्हें साइट से ब्लॉक कर देता है। लाखों लोग हर दिन नौकरियों के लिए LinkedIn का उपयोग करते हैं। जब वो नौकरी ढूंढ रहे होते हैं तो वो नौकरी देने वालों से चैट करते हैं। ऐसे में यह पता लगाना कि वो सही व्यक्ति से बात कर रहे हैं या नहीं मुश्किल हो जाता है।

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लेकिन कंपनी इसके लिए कड़े सुरक्षा कानून अपना रही है और हम LinkedIn पर कहीं भी धोखाधड़ी की गतिविधि की अनुमति नहीं देते हैं। हम फेक अकाउंट्स या धोखाधड़ी वाले भुगतानों का पता लगाने और उनका पता लगाने के लिए स्वचालित और मैनुअल डिफेंस का उपयोग करते हैं।

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