चार डॉक्टरों पर ऑपरेशन थियेटर में युवती से रेप का आरोप, पुलिस ने जांचे बिना क्लीन चिट दे दी

उत्तर प्रदेश का प्रयागराज. यहां का स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल. 21 साल की एक लड़की को यहां भर्ती कराया गया. आरोप है कि चार डॉक्टरों ने उसका रेप किया. अस्पताल और पुलिस की तरफ से इन आरोपों को नकार दिया गया है.  लेकिन पीड़िता का परिवार उन्हें डराने-धमकाने का आरोप लगा रहा है. पीड़िता अभी भी अस्पताल में भर्ती है.

क्या है मामला?

पीड़िता के भाई ने पुलिस में शिकायत की है. इसमें उसने आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है. शिकायत के मुताबिक, पीड़िता का पूरा परिवार मिर्जापुर का रहने वाला है. पीड़िता की आंत में कोई शिकायत थी, तो 29 मई को शाम उसे प्रयागराज के स्वरूप रानी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

अपनी शिकायत में भाई ने कहा है कि डॉक्टरों ने उसकी बहन का ऑपरेशन करने की बात कही थी. 31 मई को जब पीड़िता को ऑपरेशन थियेटर से बाहर निकाला गया, तो वह चीख-चिल्ला रही थी. शिकायत के मुताबिक, पीड़िता कुछ कहना चाहती थी. लेकिन हालत ऐसी नहीं थी कि वो कुछ ढंग से बोल पाए.

इसके बाद पीड़िता को लिखने के लिए पेन और कागज दिया गया. जिसमें उसने चार डॉक्टरों पर रेप का आरोप लगाया. शिकायत में लिखा गया कि पीड़िता से जब पूछा गया कि क्या उसका रेप हुआ है, तो उसने हां में अपना सिर हिलाया. इसका वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया. जिसे दी लल्लनटॉप ने देखा है. इस वीडियो में पीड़िता से यह सवाल भी किया गया है कि क्या वह पुलिस को अपनी गवाही देगी. इसके जवाब में भी वो हां में सिर हिलाती है.

अस्पताल प्रशासन-पुलिस की सांठगांठ?

इस मामले को और विस्तार में जानने के लिए हमने पीड़िता के लिए न्याय की आवाज उठा रहे अक्षय यादव से बात की. अक्षय यादव कांग्रेस पार्टी की छात्र इकाई NSUI से जुड़े हुए हैं. उन्होंने हमें बताया कि इस मामले में अस्पताल प्रशासन और पुलिस आपस में मिले हुए हैं और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है.

अक्षय यादव ने बताया कि हंगामा होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने ऑपरेशन थियेटर में पीड़िता के ऑपरेशन के दौरान दो महिला डॉक्टरों की मौजदूगी की बात कही है. यह पूरी तरह से झूठ है. अक्षय यादव ने यह भी बताया कि पुलिस ने बिना किसी जांच के ही इस अस्पताल के बयान के आधार पर ट्वीट कर दिया है, जिसमें अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी गई है.

बलात्कार की बढ़ती घटनाओं के खिलाफ प्रोटेस्ट (प्रतीकात्मक फोटो: PTI)

अक्षय यादव ने यह भी बताया कि पीड़िता के परिवार पर FIR दर्ज ना करने का दबाव बनाया गया. जबकि परिवार FIR दर्ज कराने के लिए तैयार था. इसके लिए पीड़िता का लिखित बयान भी दर्ज करा लिया था. यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले खुद की FIR दर्ज ना कराने का दबाव बनाया और फिर खुद ही यह भी कहा कि परिवार की तरफ से FIR दर्ज नहीं कराई गई. जबकि पीड़िता के भाई ने तीन जून को ही इस मामले में शिकायती पत्र कोतवाली थाने को दे दिया था.

अस्पताल प्रशासन की तरफ से रेप की बात बार-बार नकारी जा रही है. मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल की तरफ से जारी बयान में पीड़िता के ऑपरेशन के दौरान महिला डॉक्टरों के मौजूद होने की बात पर जोर दिया गया है. प्रिंसिपल ने सीनियर डॉक्टरों की कमेटी गठित कर इस मामले की जांच कराने की बात भी कही है. डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंसिपल ने यह भी कहा है कि मेडिकल कॉलेज को बदनाम करने की साजिश हो रही है.

पुलिस का क्या कहना है?

इस मामले में प्रयागराज आईजी रेंज की तरफ से 3 जून को ट्वीट किया गया. जिसमें लिखा गया-

हालांकि, इस ट्वीट में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है कि प्रयागराज पुलिस किस आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंची कि डॉक्टरों पर लगाए गए आरोप निराधार हैं. पुलिस ने यह भी नहीं बताया कि क्या उसने पीड़िता और पीड़िता के परिवार से संपर्क करने की कोशिश की. सवाल यह भी है कि पीड़िता के भाई की शिकायत के बाद भी अभी तक इस मामले में FIR दर्ज क्यों नहीं हुई?

इन सवालों के जवाब के लिए हमने प्रयागराज के एसएसपी और आईजी को बारी-बारी से फोन मिलाया. हमसे बार-बार यही कहा गया कि अधिकारी फिलहाल मीटिंग में व्यस्त हैं. हमने कोतवाली पुलिस स्टेशन भी फोन किया. वहां से हमें कोई जवाब नहीं मिला. अगर पुलिस के तरफ इन सवालों के जवाब हमें मिलते हैं, तो स्टोरी को अपडेट कर दिया जाएगा.


 

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