चुनाव के ठीक पहले यूपी के लाखों युवा प्रयागराज की सड़कों पर क्यों ताली और थाली पीट रहे हैं?

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में एक मोहल्ला है सलोरी. बीते 4 जनवरी को आधी रात यहां कुछ ताली-थाली की आवाज गूंजने लगी. ठीक उसी तरह से जैसे कभी प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना वारियर्स को प्रोत्साहित करने के लिए बजवाई थी. लेकिन इस बार जो आवाज गूंज रही थी, वो कोरोना वारियर्स के प्रोत्साहन के लिए नहीं थी. पिछले 8 महीनों से शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे कुछ युवाओं ने इसकी शुरुआत की और फिर इसमें अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र भी जुड़ते गए.

घरों से निकलकर ये आवाज धीरे-धीरे सड़कों की ओर बढ़ने लगी और फिर युवाओं के मार्च में बदल गई. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज तक पहुंचते-पहुंचते ये मार्च हजारों छात्रों की सभा में तब्दील हो गई. जनवरी की ठंड में आधी रात को ताली-थाली बजा रहे ये युवा उत्तर प्रदेश सरकार से भर्तियों को नियमित करने की मांग कर रहे थे. इसमें शिक्षक भर्ती, लेखपाल भर्ती, ग्राम विकास भर्ती (VDO) सब शामिल थे. 4 जनवरी को प्रयागराज के बाद 5 जनवरी को अयोध्या में युवा ताली-थाली बजाते सड़क पर उतर गए.

शिक्षक भर्ती

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले तीन साल से वे उत्तर प्रदेश में नई शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे हैं. बीटीसी प्रशिक्षु नीरज कसौधन बताते हैं,

अखिलेश यादव की सरकार में शिक्षामित्रों को बिना पात्रता परीक्षा कराए समायोजित कर लिया गया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद समायोजन को रद्द कर दिया गया था. जिसके बाद सरकार ने दो बार में उन्हीं 1 लाख 37 हजार रिक्त पदों को भरने के लिए वैकेंसी निकाली. एक वैकेंसी 68500 पदों पर और दूसरी 69000 पदों पर. इस (योगी) सरकार में कोई नई वैकेंसी नहीं आई. जबकि हर साल करीब 2 लाख प्रशिक्षु ट्रेनिंग लेकर तैयार हो रहे हैं. जब आपको वैकेंसी निकालनी ही नहीं है तो फिर ये सब क्यों?

पिछले तीन साल से हम लोग नई शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे हैं. पिछले 22 जून से अब तक हम लोग पचासों बार इलाहाबाद से लेकर लखनऊ तक प्रदर्शन कर चुके हैं. पीएनपी, एससीईआरटी, विधान भवन से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक हजारों की संख्या में प्रशिक्षु शिक्षक प्रदर्शन कर चुके हैं. हम बस यही चाहते हैं कि आचार संहिता से पहले ऑफिसियल नोटिफिकेशन जारी हो. समय से परीक्षा हो और नियुक्ति पत्र मिले. अब आश्वासन से कुछ नहीं होगा. वैकेंसी नहीं तो वोट नहीं.

69 हजार शिक्षक भर्ती की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने मई 2020 में खुद सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर स्वीकार किया था कि प्राथमिक शिक्षकों के 51 हजार पद खाली हैं.

सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश का हलफनामा, जिसमें 51 हजार सीट खाली होने की बात कही गई.

बीटीसी ट्रेनिंग पूरी कर चुके अभ्यर्थी इन पदों को भरने की मांग कर रहे हैं. 97 हजार पदों पर भर्ती की मांग के पीछे की वजह बताते हुए बीटीसी प्रशिक्षु रामानुज लल्लनटॉप से कहते हैं,

97 हजार हमारी बेसिक मांग है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर माना था कि 51 हजार पद खाली है. करीब 22 हजार पद तो 68500 की भर्ती में खाली रह गए थे. इसके अलावा हर साल करीब 10 से 15 हजार शिक्षक रिटायर होते हैं. इन सब को मिलाकर कुल करीब 97 हजार पदों के करीब बन रहे थे. अब सरकार 17 हजार नई वैकेंसी की बात कर रही है. इसमें शिक्षा मित्र भी शामिल होंगे. क्योंकि ये बात सरकार कोर्ट में भी कह चुकी है कि तीसरी भर्ती में भी शिक्षा मित्रों को शामिल किया जाएगा.

हमारा ये कहना है कि अगर आप शिक्षा मित्रों को शामिल कर रहे हैं तो फिर वो शिक्षा मित्रों वाली वैकेंसी भी लाइए न जिसमें आपने 51 हजार पदों के खाली होने की बात कही थी. जो हलफनामा में आपने माना है वो तो दीजिए न. लेकिन आप वो भी नहीं दे रहे हैं.

शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर पिछले 30 दिनों से लखनऊ के ईको गार्डन में भी बीटीसी प्रशिक्षु धरने पर बैठे हैं. 4 जनवरी को इन प्रशिक्षुओं का एक प्रतिनिधिमंडल बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी से मिलने उनके निर्वाचन क्षेत्र इटवा गया था. लेकिन वहां भी प्रशिक्षुओं को निराशा ही हाथ लगी.

97 हजार शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी से मुलाकात करते अभ्यर्थी
97 हजार शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी से मुलाकात करते अभ्यर्थी

प्रतिनिधिमंडल में शामिल अनंत सिंह बताते हैं,

छात्रों की मांग थी कि 97 हजार पदों पर भर्ती जारी की जाए. उम्मीद थी कि आचार संहिता लगने से पहले सरकार विज्ञापन निकालेगी. लेकिन मंत्री जी से मुलाकात हुई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि 97 हजार पदों पर विज्ञापन नहीं आएगी. 17 हजार पर भी उनका यही कहना था कि मीटिंग होने के बाद ही क्लियर होगा. अभी कुछ नहीं. सरकार के रवैये से छात्रों में निराशा है और सरकार के प्रति नाराजगी भी है. सरकार, छात्रों की उम्मीद और भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. अगर सरकार हमारी बात नहीं सुनती है तो फिर आने वाले चुनाव में प्रशिक्षुओं की ओर से विरोध किया जाएगा.

शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर धरने पर बैठे अभ्यर्थी
शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर धरने पर बैठे अभ्यर्थी

ग्राम विकास अधिकारी (VDO)

यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 22 और 23 दिसम्बर 2018 को ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और समाज कल्याण पर्यवेक्षक के पदों पर परीक्षा आयोजित की थी. 16 जिलों के 572 परीक्षा केंद्रों पर. ख़बरों के मुताबिक़ क़रीब 9 लाख अभ्यार्थियों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया. पद थे 1953. इस लिखित परीक्षा का रिजल्ट आया अगस्त 2019 के दरम्यान. रिजल्ट आने के अगले ही दिन योगी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री राजेंद्र सिंह मोती ने सीएम योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिख परीक्षा में धांधली की शिकायत की.

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राजेंद्र सिंह ने सीएम योगी आदित्यनाथ को रिजल्ट आने के अगले ही दिन चिट्ठी लिख शिकायत की थी.

इस चिट्ठी में राजेंद्र सिंह मोती ने दो अभ्यर्थियों के रोल नंबर शेयर किए और कहा कि ओएमआर शीट की कार्बन-कॉपी के हिसाब से इन दोनों ने लगभग पांच प्रश्न हल किए हैं. लेकिन जो अभ्यार्थियों की मूल ओएमआर कॉपी है, उसमें सभी प्रश्नों पर गोले बनाए गए हैं. यानी परीक्षा पूरी होने के बाद मूल ओएमआर शीट पर उत्तर भरे गए थे. राजेंद्र सिंह मोती के मुताबिक़ दोनों अभ्यर्थी उत्तीर्ण थे. साथ ही कार्बन कॉपी और मूल ओएमआर शीट में अंतर का मतलब है कि भर्ती में गड़बड़ी हुई है.

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24 मार्च को इस परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की गई थी

आरोप सीधे आयोग पर लगे तो आयोग ने प्रारंभिक जांच कराई. बाद में जांच SIT को सौंप दी गई. SIT जांच में पता चला कि परीक्षा के बाद OMR शीट में गड़बड़ी की गई थी. धांधली करने वाले लोग आयोग के स्कैनिंग रूम से कॉपी निकाल कर बाहर ले गए और उसमें ऑन्सर भरकर वापस रख गए थे. इस मामले में 11 लोग गिरफ्तार किए गए. मार्च 2021 में UPSSSC ने ग्रामीण विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी की भर्ती के लिए आयोजित हुई परीक्षा को रद्द कर दिया. 2 साल तक छात्र भर्ती का रिजल्ट जारी करने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे. अब परीक्षा ही रद्द हो गई तो दोबारा परीक्षा कराने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं.

लेखपाल भर्ती

10 मार्च 2021. ट्विटर पर एक वीडियो योगी आदित्यनाथ के ऑफिस की ओर से डाला गया. जिसमें लेखपाल के पद पर कार्यरत दुर्गेश चौधरी जी समयबद्ध परीक्षा और समयबद्ध परिणामों के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दे रहे थे. वीडियो आया तो अभ्यर्थियों ने पूछना शुरू किया कि जब पिछले साढ़े चार साल में वैकेंसी ही नहीं आई तो फिर दुर्गेश चौधरी की भर्ती कैसे हो गई? उत्तर प्रदेश में आखिरी लेखपाल भर्ती 2015 में आई थी. 2016 में ये भर्ती पूरी हो गई थी. तब अखिलेश यादव की सरकार थी. दुर्गेश चौधरी जी को भी तभी नियुक्ति मिली थी. जब सोशल मीडिया पर युवाओं ने घेरना शुरू किया तो वीडियो डिलीट कर दिया गया.

योगी आदित्यानाथ ऑफिस के अकाउंट से ट्वीट किए गए इस वीडियो को बाद में डिलीट कर दिया गया था
योगी आदित्यानाथ ऑफिस के अकाउंट से ट्वीट किए गए इस वीडियो को बाद में डिलीट कर दिया गया था

उत्तर प्रदेश में लेखपाल के करीब 8 हजार पद खाली हैं. लंबे समय से अभ्यर्थी इन खाली पदों को भरने की मांग कर रहे हैं. 4 जनवरी को प्रयागराज में हुए विरोध-प्रदर्शन में भी एक बार फिर से लेखपाल भर्ती की मांग उठी और अगले दिन यानी कि 5 जनवरी की शाम उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की ओर से 8085 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया. प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी इसे अपनी जीत बता रहे हैं.

रोजगार के मुद्दे को लेकर मुखर संगठन युवा हल्ला बोल के कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद इसे प्रदर्शनकारी युवाओं की जीत बताते हैं. लल्लनटॉप से बात करते हुए गोविंद कहते हैं,

रोजगार के लिए आंदोलित युवाओं को लगातार नजरअंदाज करने की कोशिश की जा रही है. बेरोजगार युवाओं के हर वाजिब सवाल के जवाब में पुलिस की लाठियां मिलती हैं. प्रदेश भर के युवा आंदोलित हैं और इलाहाबाद के सलोरी में प्रदर्शन कर रहे प्रतियोगी छात्र, आंदोलित युवाओं के आक्रोश का चेहरा हैं. हम 97 हजार शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती की विज्ञप्ति जारी करने और UPSSSC की सभी लंबित भर्तियों को जल्द से जल्द पूरी करने की मांग के साथ हैं. साथ ही युवा हल्ला बोल संगठन लंबे समय से ‘परीक्षा आचार संहिता’ लागू करने की मांग कर रहा है जिससे भर्ती के नोटिफिकेशन से लेकर जोइनिंग तक की प्रकिया 9 महीने में पूरी हो सके.

कब भरेंगे खाली पद?

सितंबर 2020 में रोजगार के मुद्दे पर छात्रों ने एक बड़ा कैंपेन चलाया था. सोशल मीडिया से शुरू हुआ ये कैंपेन उत्तर प्रदेश में सड़क तक आ गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन यानी 17 सितंबर को हजारों युवाओं ने सड़क पर उतर कर अपना विरोध दर्ज कराया था. जिसके बाद 18 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विभागों से खाली पदों का ब्यौरा मांगा था. साथ ही तीन महीने में सभी पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और छह महीने में नियुक्ति पत्र बांटने का आदेश भी दिया था.

सीएम योगी के इस फैसले को खूब जोर-शोर से प्रचारित किया गया. लेकिन अब तक इस फैसले का असर कुछ खास नहीं दिखा है. शिक्षक भर्ती की मांग पिछले तीन साल से हो रही है. सरकार ने भी स्वीकार किया कि पद खाली हैं, लेकिन इसके बावजूद भर्ती नहीं निकाली गई. इसी तरह लेखपाल के पद भी खाली होने की बात लंबे समय से चल रही है. लेकिन भर्ती आई है चुनाव से दो महीने पहले.


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