जब मराठी में कही गई एक लाइन पर अजिंक्य रहाणे ने मार दिए थे 188 रन

अजिंक्य रहाणे. इंडियन टीम का नंबर 5 बैट्समैन. अक्टूबर 2016 के इंदौर टेस्ट में रहाणे ने सेंचुरी मारी थी. दो सौ से बस 12 रन दूर रह गया था. विराट कोहली के साथ 365 रन की पार्टनरशिप की. 4 छक्के मारे. 18 चौव्वे. ये उसी मैच का किस्सा है.

टेस्ट मैच के पहले दिन जब रहाणे 79 रन बनाकर नॉटआउट वापस आये तो एक रिवाज़ की तरह कोच प्रवीण आमरे को फ़ोन किया. पहला दिन जद्दोजेहद से भरा था. पटकी हुई गेंदें, हेलमेट पे पड़ी एक बाउंसर, पसलियों पर लगी एक गेंद और कई बार डक करने की कोशिश ने उन 79 रनों को और भी जुझारू बना दिया था. प्रवीण आमरे को फ़ोन करके कहा, “डबल पेस आहे विकेट ला.” (विकेट में डबल पेस है.) “तू फ़क्त उभा रहा, रन्स येतील.” (तुम जमे रहो. रन्स आयेंगे.) एक मराठी प्लेयर की अपने मराठी कोच से एक छोटी सी बात. और रहाणे ने वही किया. डटा रहा. पूरे दिन. 188 मारे. आउट हुआ तो पूरे देश को उसकी डबल सेंचुरी न बन पाने का दुःख था. लेकिन काम कर गया था. इंडिया ने 557 रन पर इनिंग्स डिक्लेयर कर दी थी. आगे मैच भी जीता.

प्रवीण आमरे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, “उसकी तैयारी ने उसे काफी मदद की है. वो कोलकाता में पुल मारने के चक्कर में आउट हुआ था. इसलिए उसने ये तय किया होगा कि वो पुल नहीं मारेगा. वो उन गेंदों की चोट अपनी छाती पर सहने को तैयार था. टीम्स ने उसके खेल के हिसाब से प्लान बनाना शुरू कर दिया है. देखिये उसने कैसे खेला है. ये पिछले कुछ दिनों में उसकी सबसे बेहतरीन बैटिंग है.”

साऊथ अफ्रीका को छोड़ दें तो रहाणे ने सभी देशों में सेंचुरी मारी है. इसके पीछे रहाणे की बिना शर्त की गयी तैयारियों का हाथ है. अमरीका में 2 टी-20 खेल के आने के तुरंत बाद ही रहाणे ने प्रवीण आमरे को फ़ोन कर एक इंडोर सेशन कराने को कहा. जब पूछा गया कि उन्हें थकान नहीं हुई तो रहाणे ने बताया कि “मैं सुबह 6 बजे सोया, 12 बजे उठा. लेकिन न्यूज़ीलैंड सीरीज़ इतनी नज़दीक थी कि तैयारी करने का टाइम कम ही था. मैं अपनी प्रैक्टिस से कभी कोई समझौता नहीं करता. बस आदत बन गयी है.”

एक बात जो काफ़ी मज़ेदार थी वो ये कि कोहली के दोहरे शतक में रहाणे की इनिंग्स नहीं दबी. अक्सर ऐसा होता नहीं है. कोहली जहां आउटस्पोकन, अपने आपको भरपूर मात्रा से भी ज़्यादा एक्सप्रेस करने वाले, जश्न मनाने वाले प्लेयर हैं, वहीं रहाणे शांत, अपने तक सीमित रहने वाले प्लेयर हैं. मगर रहाणे की ये इनिंग्स बिना नोटिस हुए नहीं गई. रहाणे ने खुद इस इनिंग्स के बारे में खुशी से बात करते हुए बताया था, “मैं शुरुआत में स्ट्रगल कर रहा था. और अगर आप टेस्ट मैच खेल रहे हैं तो स्ट्रगल करने में कोई शर्म भी नहीं होनी चाहिए. टाइम और सिचुएशन बदलती रहती हैं. जब आप स्ट्रगल कर रहे होते हैं तो आप बीट हो रहे होते हैं, हेलमेट पे चोट खा रहे होते हैं. या टीवी पे अजीब दिख रहे होते हैं.”

कहते हैं,“आप जितना ज़्यादा स्ट्रगल कर रहे होते हैं, आपका हंड्रेड आपको उतना ही सुकून देता है.” कहते हैं कि उस हंड्रेड की फ़ीलिंग ही एकदम अलग होती है. उन्हें ये अहसास हो गया है कि आप हर 130-140 गेंद में सौ नहीं मार सकते. कई बार आप टिके रहते हैं और 200-300 गेंदों को झेलना होता है.

अग्रेशन मात्र मैदान पर चीखना, ताली पीटना, या गालियां देना नहीं होता. और ये बात रहाणे ने साबित कर भी दी. रहाणे ने स्पिनर्स पर अटैक किया. ऐसा कि उन्हें बॉलिंग से हटाना पड़ा. पेस बॉलर्स को वापस लाना पड़ा. यही रहाणे चाहते थे. वो चाहते थे कि इंदौर की गरमी में पेस बॉलर्स पसीना बहाते-बहाते थक जायें. और इसके साथ ही तेज़ बॉलर्स के पैरों से इंडियन स्पिनर्स के लिए रफ़ स्पॉट्स तैयार हो रहे थे.

अजिंक्य रहाणे. यानी इंडिया का सॉलिड नंबर 5 बैट्समैन. जो पूरी तरह से अपने गेम के प्रति डेडीकेटेड है. जो पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरता है. जिसे स्ट्रगल पसंद है. जिसे कठिन कंडीशन में बैटिंग करना भाता है.


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