नरेंद्र मोदी ने की भाषण में योगी सरकार की झूठी तारीफ़, किये ग़लत दावे, दिये ग़लत आंकड़े

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव साल 2022 में फ़रवरी से मार्च के बीच होने वाले हैं. चुनावों के दौरान मौजूदा सरकार द्वारा अपने शासन के दौरान विकास कार्यो की सराहना करना आम बात है. 15 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने यूपी में कुछ प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करते हुए योगी सरकार की तारीफ़ की थी.

30 मिनट लंबे अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कई दावे किये जिसमें से कुछ दावे भ्रामक और ग़लत थे. ऐसा भी कई बार हुआ जब नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान BJP के बारे में अपनी राय को तथ्यों के रूप में पेश किया.

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का विश्लेषण

दावा 1 : यूपी सरकार ने देश में सबसे ज़्यादा कोरोना टेस्ट्स और वैक्सीनेशन किया

अपने भाषण में प्रधानमंत्री कहते हैं, “आज यूपी कोरोना की सबसे ज़्यादा टेस्टिंग करने वाला राज्य है. आज यूपी पूरे देश में सबसे ज़्यादा वैक्सीनेशन करने वाला राज्य है.” नीचे वीडियो में आप इसे 7 मिनट 15 सेकंड पर देख सकते हैं.

COVID19India.org के मुताबिक, यूपी ने सबसे ज़्यादा टेस्ट्स किये हैं. लेकिन यूपी देश का सबसे ज़्यादा जनसंख्या वाला राज्य भी है.

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MoHFW के नवीनतम डेटा के मुताबिक, यूपी में कोरोना वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज़ दिए जाने की संख्या बाकी राज्यों से ज़्यादा है. लेकिन जब इस डेटा को प्रति लाख लोगों के हिसाब से देखा जाए तो एक अलग ही तस्वीर नज़र आती है.

ऑल्ट न्यूज़ ने आधार कार्ड धारकों की संख्या के आधार पर सभी राज्यों में प्रति लाख जनसंख्या पर दोनों डोज़ लेने वाले लोगों की संख्या का विश्लेषण किया.

इस डेटा के आधार पर यूपी में प्रति लाख लोगों के हिसाब से 3,516.89 लोग टीके की दोनों डोज़ ले चुके हैं. ये दूसरा सबसे कम आंकड़ा है जो 7,575.84 की राष्ट्रीय दर से बहुत कम है. (स्प्रेडशीट देखें)

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प्रधानमंत्री के इस दावे को जहां आंकड़ों से काउन्टर किया जा सकता है, वहीं उन्होंने ऐसे भी कुछ दावे किये जो ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर दिखे. जब प्रधानमंत्री ने कोरोना को फैलने से रोकने के लिए योगी आदित्यनाथ की तारीफ़ करते हुए उनके प्रयासों को “अभूतपूर्व” कहा, तब वो कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गंगा में बहती हुई लाशों और श्मशान घाटों पर अनवरत जलती हज़ारों चिताओं का ज़िक्र करना भूल गये.

दावा 2 : योगी शासन में यूपी में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 4 गुना बढ़ी है

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “4 साल पहले तक यहां यूपी में दर्जन भर मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे उनकी संख्या अब करीब-करीब चार गुना हो चुकी है.”

योगी आदित्यनाथ ने मार्च 2017 में यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. MoHFW डेटा के मुताबिक, 2016 तक यूपी में 38 कॉलेज थे.

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2021 में ये संख्या 57 हो गई. लेकिन ये आंकड़ा पिछले आंकड़े से 4 गुना ज़्यादा नहीं है. 4 गुना बढ़ने का मतलब है कि यूपी में फ़िलहाल 152 मेडिकल कॉलेज होने चाहिए थे जो सच नहीं है.

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दावा 3 : जल जीवन मिशन परियोजना तेज़ी से आगे बढ़ रही है.

अपने भाषण के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि यूपी सरकार तेज़ी से लोगों के घरों तक साफ़ पानी पहुंचाने का काम कर रही है. वो भाजपा सरकार के 2019 के जल जीवन मिशन की बात कर रहे थे. 2024 तक ग्रामीण इलाकों के हर घर तक पानी का नल पहुंचाना इस योजना का लक्ष्य बताया गया था. JJM मिशन की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के आधार पर, पिछले 2 सालों में यूपी के ग्रामीण घरों में पानी का कनेक्शन पहुंचने के कुल आंकड़ों में 1.96% से 11.99% की बढ़ोत्तरी हुई है. लेकिन इस समय सीमा में बिहार में नल कनेक्शन पहुंचने के आंकड़ों में 1.84% से 85.74% की बढ़ोत्तरी हुई है. आंकड़ों की मानें तो बिहार में 1,44,15,050 कनेक्शन लगे हैं जो सबसे ज़्यादा हैं. जबकि यूपी में 26,32,761 कनेक्शन पहुंचे हैं जो कि देश में चौथे नंबर पर आता है.

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दावा 4 : योगी आदित्यनाथ के शासन के दौरान महिलाओं के लिए सबसे ज़्यादा सुरक्षित प्रदेश यूपी है

प्रधानमंत्री मोदी ने यूपी के “कानून और प्रशासन” की भी सराहना की. उनका कहना था कि यूपी में माता-पिता अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर डरे हुए थे. लेकिन अब ये बदल गया है. उन्होंने कहा कि जो लोग हमारी बेटियों और बहनों को परेशान करते थे अब उन्हें पता है कि वो कानून से नहीं बच सकते. प्रधानमंत्री मोदी ने ये बात हाथरस में हुए सामूहिक बलात्कार की घटना के कुछ महीनों बाद कही. इस घटना के कारण यूपी सरकार को काफ़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी. सरकार पर महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले अत्याचार के मामलों में ज़्यादातर दलित महिलाओं के मामलों में ढंग से कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगे थे.

2017 के उन्नाव रेप केस के वक़्त भी यूपी सरकार पर शारीरिक शोषण के मामलों में कार्रवाई को लेकर आरोप लगे थे. इस केस में 2 साल के बाद भाजपा नेता और विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में सज़ा मिली थी. ये भी तब जब लड़की ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के घर के बाहर आत्मदाह करने की कोशिश की थी. इस पूरे मामले में पीड़ित लड़की के पिता की कस्टडी में ही मौत हो गई थी.

नेशनल क्राइम ब्यूरो (NCRB) के नवीनतम डेटा (2019) के मुताबिक, यूपी पूरे देशभर में महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले अपराधों में सबसे ऊपर (14.7%) है. पिछले रिपोर्ट का डेटा भी यही बताता था.

रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में महिलाओं के खिलाफ़ अपराध में सज़ा का दर 55.2 है जो लिस्ट में चौथे नंबर पर है. इस लिस्ट में सबसे ऊपर मिज़ोरम है जिसका आंकड़ा 88.3 है. मणिपुर दूसरे स्थान पर (58) और तीसरे स्थान पर मेघालय (57.3) है. [देखें ​PDF]

यूपी में महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले अपराधों की कुल संख्या 199,553 है. ये आंकड़ा पूरे देश में तीसरा सबसे ज़्यादा है. इस लिस्ट में सबसे पहले पश्चिम बंगाल (263,854) और दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र (220,435) है. [देखें ​PDF]

ऑल्ट न्यूज़ को लेटेस्ट NCRB का डेटा भी मिला जिसमें यूपी की स्थिति गंभीर दिखती है :

1. यूपी में हिरासत में महिलाओं के साथ होने वाले बलात्कार का आंकड़ा सबसे ज़्यादा 22 है. इसमें 10 मामलों के अपराधी सरकारी नौकर होते हैं. और 12 मामले प्रशासन/जेल का स्टाफ़/रिमान्ड होम/कस्टडी की जगह से सामने आते हैं. (PDF देखे)

2. यूपी दहेज के कारण होने वाली हत्याओं के मामले में भी चरम पर है जो प्रति लाख के हिसाब से 2.2 है. ये आंकड़ा पूरे देश के औसत आंकड़े से भी 2 गुना ज़्यादा है. (PDF देखें)

3. यूपी में गर्भपात और एसिड अटैक का आंकड़ा भी पूरे देश में सबसे ज़्यादा है. (PDF देखें)

4. 20 लाख से ज़्यादा की आबादी वाले शहरों में महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले अत्याचार (ROTC) के मामलों में यूपी और महाराष्ट्र आगे हैं. लेकिन यूपी के 3 शहरों में ROTC की संख्या महाराष्ट्र के मुकाबले कहीं ज़्यादा है. साथ में, लखनऊ में दूसरे नंबर पर सबसे ज़्यादा ROTC के मामले पाये जाते हैं. सबसे ज़्यादा ROTC के मामले राजस्थान के जयपुर में हैं. (PDF देखें)

5. बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के केस दर्ज होने के मामले में यूपी देश में दूसरे नंबर पर है. इस लिस्ट में पहले स्थान पर राजस्थान है. (PDF देखें)

कुल मिलाकर, यूपी सरकार की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ दावे किये. इसमें यूपी सरकार की उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ा कर और यूपी सरकार के प्रति अपनी राय को प्रधानमंत्री मोदी ने तथ्य बताते हुए पेश किया. उन्होंने कोरोना से हुई मौत के आंकड़े और यूपी में ऑक्सीजन की कमी को नज़रंदाज़ कर दिया. सही आंकड़े दिए बिना उन्होंने योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा की. यूपी में महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले अत्याचार के मामले काफ़ी ज़्यादा हैं. फिर भी प्रधानमंत्री मोदी ने यूपी में महिलाओं के सुरक्षित होने की बात कही.


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