पीएम मोदी का काफिला पंजाब में रोका, ज़िम्मेदार कौन?

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आज प्रधानमंत्री को फिरोजपुर से पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी का चुनाव प्रचार अभियान शुरू करना था. पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले पीएम की यह सूबे में पहली रैली थी और इस रैली को लेकर पीएम ने ट्वीट कर अपनी उत्सुकता भी जाहिर की थी. रैली के अलावा फिरोजपुर में 42 हजार 750 करोड़ की लागत से होने वाले विकास कार्यों का शिलान्यास भी होना था. साथ ही तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद यह पहला मौका था जब मोदी पंजाब की धरती पर कदम रख रहे थे.

लेकिन दोपहर 2 बजे के आसपास खबर आती है कि पीएम मोदी की फिरोजपुर रैली रद्द हो चुकी है. रैली रद्द होने की फौरी वजह समाने आती है रैली स्थल पर हो रही लगातार बारिश. बाद में पता चलता है कि प्रदर्शनकारियों के चलते रैली नहीं हो पाई. क्योंकि पीएम मोदी का रास्ता रोक लिया गया था वो काफी देर एक फ्लाईओवर पर फंसे रहे.

आज दोपहर ही न्यूज़ एजेंसी ANI के हवाले से खबर आती है कि दिल्ली लौटते समय पीएम मोदी ने बठिंडा एयरपोर्ट पर अधिकारियों से सीएम चन्नी को शुक्रिया बोलने को कहा. पीएम ने कहा, अपने सीएम को थैंक्स बोलना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा लौट पाया.

बारिश के कारण रैली का रद्द होना समझ में आता है लेकिन प्रदर्शनकारियों की वजह से रैली का रद्द होना थोड़ा अजीब लगता है. इसी बात को समझने के लिए सारी कहानी एकदम शुरू से बताते हैं.

दिल्ली से निकलकर पीएम मोदी रैली के लिए सुबह करीब साढ़े दस बजे बठिंडा के भिसियाना एयरबेस पर पहुंचे. यहां पर पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने उनका स्वागत किया. गृहमंत्रालय के मुताबिक, मोदी को बठिंडा से हेलिकॉप्टर पर सवार होकर राष्ट्रीय शहीद स्मारक हुसैनवाला के लिए रवाना होना था.

बारिश और खराब मौसम के चलते पीएम ने करीब 20 मिनट तक मौसम के साफ होने का इंतजार किया. लेकिन जब मौसम साफ नहीं हुआ तो तय किया गया कि सड़क रास्ते के जरिए हुसैनवाला पहुंच जायेगा. अमूमन इस दूरी को तय करने में 2 घंटा लगता है. सड़क से यात्रा में पीएम के सुरक्षा की जिम्मेदारी थी पंजाब पुलिस के डीजीपी की जैसा कि गृह मंत्रालय ने बताया है.

लेकिन राष्ट्रीय शहीद स्मारक हुसैनवाला से करीब 30 किमी पहले जब प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाइओवर पर पहुंचता है तो पता चलता है कि रास्ते को कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा जाम किया गया है. घटना से जुड़ी तस्वीरों को भी सार्वजनिक किया गया जिसमें आप फ्लाइओवर पर खड़ी मोदी के काफिले की गाड़ियों को देख सकते हैं. करीब 15 से 20 मिनट तक इंतजार करने के बाद मोदी को बिना रैली के वापस बठिंडा लौटना पड़ा.

गृह मंत्रालय ने इस पूरी घटना को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में एक बड़ी चूक मानते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. साथ ही गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को इस चूक की जिम्मेदारी तय करने और सख्त कार्रवाई करने को कहा है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक फिरोज़पुर के एसएसपी हरमनदीप सिंह हंस को निलंबित कर दिया गया है.

पीएम के पंजाब दौरे से एक दिन पहले ही किसान संगठनों ने अलग-अलग रास्तों पर बैठकर विरोध करने का ऐलान किया था. प्रदर्शनकारियों ने फिरोजपुर मोगा रोड और फ़िरोज़पुर-फाजिल्का जैसे मुख्य मार्ग समेत कई रास्तों को जाम कर रखा है. इस आधार पर ये कहा कि प्रधानमंत्री का रास्ता रोककर प्रदर्शनकारियों ने अपनी असहमति का इज़हार किया है, जो कि उनका हक बनता है.

ये बात बहस से परे है कि धरना देना, रास्ता रोकना और झंडे दिखाने जैसे प्रदर्शन, जिनमें हिंसा न हो रही हो, जायज़ हैं. और उनकी ज़द में आ जाना किसी की प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बन सकता, क्योंकि हम एक लोकतंत्र हैं. लेकिन तब भी इस बात की गंभीरता कम नहीं होगी कि प्रधानमंत्री का काफिला सड़क के एक फ्लाईओवर पर 15 मिनिट खड़ा क्यों रह गया.

क्या SPG जिस रूट से प्रधानमंत्री को ले जाना चाहती थी, उसे सैनिटाइज़ कर लिया गया था? अगर ऐसा नहीं हुआ था, तो प्रधानमंत्री के काफिले को उस सड़क पर बढ़ना ही नहीं चाहिए था. प्रश्न ये भी है कि क्या पंजाब पुलिस ने SPG को सड़क के बंद होने को लेकर सटीक जानकारी उपलब्ध कराई थी? क्या इस सूचना का आदान प्रदान हुआ? अगर हां, तो क्या ये जानकारी अधूरी थी?

जब प्रधानमंत्री कहीं जाते हैं, तो एसपीजी बहुत पहले से वहां पहुंच जाती है और इंतज़ाम से संतुष्ट होने के बाद ही प्रधानमंत्री वहां पहुंचते हैं. इस काम में SPG को राज्य की खुफिया एजेंसियों के साथ साथ केंद्र की खुफिया एजेंसियों से भी इनपुट जमा करना होता है. क्या ये काम अच्छी तरह से किया गया था?

इस सवाल का जवाब पंजाब की चरणजीत सिंह चन्नी सरकार के साथ-साथ प्रधानमंत्री की सुरक्षा की ज़िम्मेदार SPG और केंद्रीय गृहमंत्रालय को भी देना होगा. फिलहाल दोनों पक्ष एक दूसरे पर ज़िम्मेदारी ठेल रहे हैं.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने बयान में साफ कहा है कि पंजाब सरकार को ये बता दिया गया था कि सड़क के रास्ते मूवमेंट के लिए अतिरिक्त बंदोबस्त तैनात रखा जाए. जो कि साफ तौर पर गायब दिखा. इन सारी बातों पर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सफाई दी –

किसी तरह का यहां कोई ख़तरा न था ना है. लेकिन फिर भी प्रधानमंत्री जी की टीम ने वापस जाने का फ़ैसला लिया. हमें इस चीज़ का खेद है. हम अपने प्रधानमंत्री को पूरा सत्कार और प्यार देते हैं और देते रहेंगे.

सीएम चन्नी ने ये भी कहा पीएम की रैली के लिए 70,000 कुर्सियां लगाई गई थीं लेकिन केवल 700 लोग ही जुटे. इस तर्क का कोई मतलब नहीं है. खासकर तब, जब सीएम चन्नी की भी ज़िम्मेदारी थी कि पीएम को उनकी मंज़िल तक सुरक्षित पहुंच जाएं. कुर्सियां कितनी भरी हैं, इसकी चिंता आखिर चन्नी को क्यों थी?

वैसे चन्नी ये सफाई लेकर राष्ट्रीय मीडिया के सामने आते, तब तक थोड़ी देर तो हो ही चुकी थी.  बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर बताया कि सीएम चन्नी ने फोन पर बात करने या इसका हल निकालने से इनकार कर दिया. पंजाब में बीजेपी के सहयोगी और पूर्व सीएम कैप्टर अमरिंदर सिंह ने भी ट्वीट कर पीएम मोदी  से जुड़ी घटना को पंजाब में कानून व्यवस्था को विफल बताते हुए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को जिम्मेदार ठहराया.

देर शाम बीजेपी की तरफ से केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पूरे मामले पर प्रेस क्राफेंस भी की. स्मृति ने अपनी प्रेस कांफ्रांस में कांग्रेस पर पीएम का हत्या के षड्यंत्र का आरोप तक लगा दिया.

आखिर में हम दो बातें कहना चाहते हैं. पंजाब में चुनाव होने वाले हैं. और चुनाव से पहले राजनीति क्या गुल खिला दे, कोई भरोसा नहीं. फिरोज़पुर में जो हुआ, उसकी पूरी जानकारी अभी सामने आ ही रही है. घटनाओं का असल क्रम और उस क्रम की सत्यता भी स्थापित होनी है. लेकिन ये बहस से परे है कि प्रधानमंत्री के काफिले का सड़क पर फंस जाना अस्वीकार्य है. केंद्रीय गृह मंत्रालय, SPG और पंजाब सरकार जल्द से जल्द इस मामले में ज़िम्मेदारी तय करें, ये बेहद ज़रूरी है.

अगली ख़बर कोरोना से जुडी है. देशभर में कोरोना के बढ़ते मामलों और ओमिक्रोन के खतरे के बीच लगातार प्रतिबंध बढ़ाए जा रहे हैं. बात नाइट कर्फ्यू से चली थी और वीकेंड लॉकडाउन तक पहुंच गई है. पूर्ण लॉकडाउन लगेगा या नहीं, इसे लेकर लोग चिंतित हैं. इस बीच सोशल मीडिया पर UPSC यानी संघ लोक सेवा आयोग की एक परीक्षा से जुड़ा मुद्दा लगातार उठ रहा है.

बीते कुछ दिनों से ट्विटर पर हैशटैग पोस्टपोन यूपीएससी मेन्स, हैशटैग यूपीएससी जैसे ट्रेंड देखे जा रहे हैं. इन हैशटैग पर ट्वीट करने वालों की मांग है कि कोरोना के खतरे के बीच यूपीएससी की मेन्स परीक्षा को स्थगित कर दिया जाए. सोशल मीडिया पर शुरू हुई मांग अब दिल्ली हाईकोर्ट के दरवाजे पर जा पहुंची है.

दरअसल UPSC हर साल सिविल सेवा परीक्षा नाम से एक एग्जाम कराता है. इस परीक्षा के जरिए देशभर में IAS, IFS,IPS और दूसरी केन्द्रीय सेवाओं के अफसरों की नियुक्ति होती है. परीक्षा तीन चरणों में होती है प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू. 10 अक्टूबर 2021 को देश भर में इस एग्जाम की प्रारंभिक परीक्षा हुई. इसमें सफल उम्मीदवारों को 7 जनवरी से 16 जनवरी तक होना वाली मुख्य परीक्षा में शामिल होना है.

अब इस मुख्य परीक्षा को कोरोना काल को देखते हुए स्थगित करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर हाईकोर्ट कल यानी 6 जनवरी को सुनवाई करने जा रहा है. दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका उन उम्मीदवारों ने दायर की है जिन्होंने सिविल सर्विसेज एग्जाम की प्रारंभिक परीक्षा को पास कर लिया है और उन्हें फिलहाल मुख्य परीक्षा में शामिल होना है.

अदालती कार्यवाही भले 6 को हो, लेकिन यूपीएससी ने अपनी ओर से जारी एक बयान में कह दिया कि आयोग तय कार्यक्रम के मुताबिक ही परीक्षा कराएगा. तो बेहतर होगा कि छात्र अपनी मांग उठाने के साथ साथ तैयारी भी जारी रखें.

वैसे कोरोना और यूपीएससी का ज़िक्र आया ही है तो हम आपको ये भी बता दें कि कई अभ्यर्थी ऐसे भी हैं, जिन्होंने कोरोना की पहली और दूसरी लहर में फ्रंटलाइन वर्कर होने के नाते परीक्षा नहीं दी, या पूरी तैयारी से नहीं दी. ये अभ्यर्थी चाहते हैं कि आयोग इन्हें एक और मौका दे. फिलहाल आयोग ने इसपर अंतिम निर्णय नहीं लिया है.

छात्रों से जुड़ी हुई एक खबर राजधानी दिल्ली से लगभग 700 किलोमीटर दूर यूपी के प्रयागराज से भी आई.

प्रयागराज में कड़ाके की ठंड के बीच मंगलवार रात को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र थाली और चम्मच लेकर शहर की सड़कों पर निकले. छात्रों ने पहले बेरोजगारी के खिलाफ इंटरनेट पर मुहिम चलाई फिर व्हाट्सएप ग्रुप्स पर थाली बजाने की अपील की. इसके बाद देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में गोविंदपुर, सलोरी, स्वराज नगर, एलनगंज के इलाकों में छात्र सड़कों पर मार्च करते दिखे.

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार केवल अपने विज्ञापनों में रोजगार दे रही है जबकि असल में कई पुरानी भर्तियां भी अटकी पड़ी हैं. यूपी में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं जिसकी अधिसूचना चुनाव आयोग से कभी भी जारी हो सकती है, ऐसे में किसी भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया शुरू होने के आसार फिलहाल तो नजर नहीं आ रहे हैं. .

तीसरी सुर्खी का संबंध है कुन्नूर हादसे से. 8 दिसंबर 2021. ये वो तारीख थी जब हमने अपने सीडीएस यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत को हमेशा के लिए खो दिया था. तमिलनाडु के कुन्नूर के पास हुए हेलिकॉप्टर हादसे में बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत कुल 14 लोगों की मौत हो गई थी. घटना की जांच के लिए एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह के नेतृत्व में तीनों सेनाओं की एक ज्वाइंट कमेटि बनाई गई थी. अब इस जांच कमेटि ने अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को दी है.

आधिकारिक रूप से अभी जांच रिपोर्ट के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि हेलिकॉप्टर में कोई तकनीकी खामी नहीं थी. जांच टीम के मुताबिक एमआई-17वी5 हेलिकॉप्टर के पायलट उस दिन विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान थे और क्रैश से ठीक 8 मिनट पहले उन्होंने हेलिकॉप्टर के लैंड होने की जानकारी दी थी. जमीन से करीब 500-600 मीटर की ऊंचाई पर उस दिन हेलिकॉप्टर के चारों ओर बादलों की मोटी परत थी और इससे लगातार विजिबिलिटी पर असर पड़ रहा था.

न्यूज एजेंसी ANI को मिले सरकारी सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को करीब 45 मिनट तक सीडीएस बिपिन रावत के चॉपर क्रैश की जांच रिपोर्ट को लेकर प्रजेंटेशन दिया गया. तीनों सेनाओं की जांच रिपोर्ट में हेलिकॉप्टर क्रैश की वजह के साथ भविष्य में वीआईपी के साथ उड़ने वाले चॉपर को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गये हैं


ये न होते तो पाकिस्तान में होता गुरदासपुर!





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