भारत ने अफगानिस्तान से 50 राजनयिकों और सुरक्षा अधिकारियों को वापस क्यों बुला लिया?

0

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

भारत ने अफगानिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा हालात और दक्षिणी अफगान शहर के आसपास के नए क्षेत्रों पर तालिबान के नियंत्रण के मद्देनजर कंधार में अपने वाणिज्य दूतावास में तैनात लगभग 50 भारतीय राजनयिकों और सुरक्षा अधिकारियों को वापस बुला लिया है.

इंडिया टुडे की गीता मोहन की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों के मुताबिक, पता चला है कि भारतीय वायु सेना के विमान से शनिवार, 10 जुलाई को 50 भारतीयों को वापस लाया गया. सूत्रों ने बताया कि स्थानीय कर्मचारी अभी भी मिशन पर हैं, लेकिन, सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए, वाणिज्य दूतावास अस्थायी रूप से बंद है.

यह फैसला विदेश मंत्रालय के उस बयान के एक दिन बाद आया है जिसमें मंत्रालय ने कहा था कि दूतावास बंद नहीं हैं, लेकिन प्रशासन स्थिति की सावधानीपूर्वक निगरानी कर रहा है और उसी के अनुसार फैसला लेगा.

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा था?

अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था,

आपने इस सप्ताह की शुरुआत में काबुल में हमारे दूतावास द्वारा जारी स्पष्टीकरण देखा होगा. काबुल में हमारा दूतावास और कंधार और मजार-ए-शरीफ में वाणिज्य दूतावास काम कर रहे हैं. हम अफगानिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और अफगानिस्तान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सुरक्षा पर इसके प्रभाव की सावधानीपूर्वक निगरानी कर रहे हैं. हमारी प्रतिक्रिया को उसी के अनुसार कैलिब्रेट किया जाएगा.

कंधार में भारतीय वाणिज्य दूतावास में भारतीय राजनयिक, सहायक कर्मचारी और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के गार्ड थे.

इस बीच अरिंदम बागची ने कहा है कि कंधार स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास को बंद नहीं किया गया है. हालांकि, कंधार शहर के पास भीषण लड़ाई के कारण, भारत स्थित कर्मियों को कुछ समय के लिए वापस लाया गया है.

चूंकि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा के हजारों सहयोगियों के तालिबान लड़ाकों में मुख्य रूप से दक्षिणी अफगानिस्तान में भीषण संघर्ष में शामिल होने की खबरें सामने आईं, इसलिए भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान को भारतीय कर्मियों की सुरक्षा को लेकर फैसला लेना पड़ा.

ऐसी खबरें थीं कि उत्तरी बल्ख प्रांत की राजधानी मजार-ए-शरीफ में कम से कम दो विदेशी मिशनों ने क्षेत्र में बढ़ती हिंसा को देखते हुए अपना अभियान बंद कर दिया है. अफगानिस्तान में बिगड़ते हालात पर भारत में बढ़ती चिंताओं के बीच अफगानिस्तान के राजदूत फरीद मामुन्दजई ने विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला को अफगानिस्तान के हालात से अवगत कराया था.

जारी की थी एडवाइजरी

भारतीय दूतावास ने पिछले हफ्ते अफगानिस्तान में आने, रहने और काम करने वाले सभी भारतीयों से कहा था कि वे अपनी सुरक्षा के संबंध में अत्यधिक सावधानी बरतें और देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर सभी प्रकार की गैर-जरूरी यात्रा से बचें.

अडवाइजरी में दूतावास ने कहा कि अफगानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति “खतरनाक” बनी हुई है. आतंकवादी समूहों ने नागरिकों को लक्षित करने सहित कई जटिल हमले किए हैं. भारतीय नागरिकों को अतिरिक्त रूप से अपहरण के “गंभीर खतरे” का सामना करना पड़ता है.

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगानिस्तान के स्थानीय अधिकारियों ने माना था कि अफगानिस्तान और ईरान की सीमा पर व्यापार के लिहाज से अहम इस्लाम खाला कस्बा भी तालिबान के हत्थे चढ़ गया है. इस्लाम काला के साथ-साथ तुर्कमेनिस्तान से लगा तोरघुंडी कस्बा भी तालिबान के कब्जे में चला गया है. दोनों कस्बे हेरात प्रांत में आते हैं. आरियाना न्यूज के मुताबिक इसके साथ ही, ईरान, तुर्कमेनिस्तान, चीन, तजाकिस्तान और पाकिस्तान से लगी इसकी सीमाओं पर तालिबान काबिज हो गया है.


दुनियादारी: तालिबान अफगानिस्तान पर पूरा कब्जा करने से पहले किस बात का इंतज़ार कर रहा है?





Source link

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.