विदेशी T20 लीगों में भारतीय खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति नहीं देने पर जानिए क्या बोले पूर्व विकेटकीपर सबा करीम 

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) दुनिया की सबसे बड़ी टी20 लीग- इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का आयोजन करता है। लेकिन भारतीय बोर्ड अपने खिलाड़ियों को वैश्विक टी-20 लीगों में खेलने की अनुमति नहीं देता है। विदेशी टी20 लीगों में खेलने के लिए केवल वही भारतीय खिलाड़ी बीसीसीआई से एनओसी ले सकता है जो या तो संन्यास ले लिया हो या फिर किसी भी तरह से भारतीय क्रिकेट से जुड़ा हुआ नहीं हो। इस बीच, पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज सबा करीम ने बीसीसीआई द्वारा अपने खिलाड़ियों को विदेशी टी-20 लीगों में भाग लेने की अनुमति नहीं देने पर अपने राय दी है। सबा करीम का मानना है कि इसने भारत को मल्टी फॉर्मेट वाले खिलाड़ियों की एक अच्छी संख्या बनाए रखने में मदद की है। 

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यूट्यूब चैनल ‘आईवीएम पॉडकास्ट’ के साथ बातचीत में सबा करीम ने कहा, ‘ वेस्टइंडीज में खिलाड़ियों को वैश्विक टी-20 लीग में भाग लेने की अनुमति है। लगभग हर देश इसकी अनुमति देता है लेकिन भारत नहीं। मुझे लगता है कि बीसीसीआई ने अपने खिलाड़ियों को दूसरे देशों में जाकर टी20 लीग नहीं खेलने देने का बहुत अच्छा फैसला किया है। इसका मतलब यह है कि खिलाड़ी चाहे वे अंडर-19, रणजी ट्रॉफी या अंडर-23 लेवल के हों, उन्हें भारत में ही रहना होगा और क्रिकेट खेलना होगा।’ 

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पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज ने आगे कहा कि भारत के डोमेस्टिक क्रिकेट में बहुत विविधता है जो एक क्रिकेटर को पर्याप्त चुनौतियां प्रदान करता है, जिससे कि वह खुद को एक मल्टी फॉर्मेट खिलाड़ी बनने के लिए तैयार कर सके। 

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उन्होंने कहा, ‘ अगर आप भारत में आयोजित डोमेस्टिक क्रिकेट टूर्नामेंटों को देखें, तो रणजी ट्रॉफी के अलावा हमारे पास अंडर-23 और अंडर-19 लेवल पर भी मल्टी फॉर्मेट हैं। इसलिए, हम वास्तव में इन टूर्नामेंटों के माध्यम से मल्टी-फॉर्मेट खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं क्योंकि इन खिलाड़ियों को विभिन्न प्रकार के क्रिकेट का अनुभव मिलता है। अगर बीसीसीआई हमारे सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों को बाहर जाकर ग्लोबल टी20 लीग में हिस्सा लेने की इजाजत देता है तो घरेलू क्रिकेट खेलने के लिए बहुत कम क्रिकेटर बचेंगे। उस स्थिति में, हमारे क्रिकेट में भी एक बड़ा शून्य पैदा हो जाएगा, जैसा कि अन्य देशों के साथ होता है।’



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