वीरता पुरस्कार जीत चुकी लड़की को नहीं मिल रहा सरकारी राशन, अवॉर्ड लौटा दिया

महाराष्ट्र के थाणे में एक आदिवासी युवती ने अपना राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार वापस कर दिया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसके परिवार को सरकारी राशन नहीं मिला. युवती का नाम हाली रघुनाथ बरफ है. इस समय वो 23 साल की है. लगभग आठ साल पहले हाली को ‘वीर बापूजी गांधानी राष्ट्रीय बालवीर पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था. हाली ने अपनी बहन को तेंदुए के हमले से बचाया था.

किसी काम का नहीं अवॉर्ड

हाली ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि उसके परिवार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत सरकारी राशन नहीं मिलता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि उसके परिवार के लोगों का विवरण ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज नहीं किया गया है. हाली ने बताया कि उसकी गृह तहसील यानी शाहपुर में ऐसे करीब 400 आदिवासी परिवार हैं, जो इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं.

हाली ने बताया कि वीरता पुरस्कार ने उसकी और उसके परिवार की जिंदगी में पर कोई असर नहीं डाला है. आज उनका परिवार दाने-दाने को मोहताज है. ऐसे में विरोध के तौर पर उन्होंने भिवंडी के सब डिवीजनल ऑफिसर के यहां पुरस्कार वापस कर दिया है.

आदिवासियों का हाल बेहाल

इस बीच खबरें यह भी हैं कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर का महाराष्ट्र के आदिवासियों पर बहुत बुरा असर पड़ा है. राज्य के लगभग 12 जिलों में आदिवासी वायरस संक्रमण से बहुत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ये जिले सिंधुगढ़, बीड, परभनी, नांदेड़, हिंगोली, अमरावती, यवतमाल, चंद्रपुर, वर्धा, वश्चिम, गढ़चिरौली और नंदूरबार हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक इन जिलों के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं लगभग नदारद रहीं, जिसकी वजह से अधिक संख्या में आदिवासियों की मृत्यु हुई. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछली लहर के मुकाबले इस बार इन जिलों में चार से पांच गुना अधिक मौतें हुईं. वहीं खराब सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के कारण लॉकडाउन के दौरान कई आदिवासी परिवारों को ढंग का पोषण भी नहीं मिल पाया. फिलहाल, प्रशासन की तरफ से इन जिलों के आदिवासी इलाकों में वैक्सीनेशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है.


 

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