वेब सीरीज़ रिव्यू: द फैमिली मैन सीज़न 2

फाइनली जिस घड़ी का सबको इंतज़ार था, वो आ गई. काफी डिले के बाद ‘द फैमिली मैन’ का सीज़न 2 आ गया है. शो 04 जून को रिलीज़ होना था. लेकिन 03 जून की रात से ही शो के सभी एपिसोड्स स्ट्रीम करने के लिए उपलब्ध हो गए थे. खैर, हमनें भी ये मनोज बाजपेयी स्टारर शो देखा. शो में हमें क्या अच्छा लगा और क्या नहीं, ऐसे तमाम पॉइंट्स पर बात करेंगे.

शो पहले इसी साल फ़रवरी में आने वाला था. फोटो – यूट्यूब

# The Family Man 2 की कहानी क्या है?

कहानी शुरू होती है श्रीलंका के एक रेबल ग्रुप से. जो तमिल लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. सरकार से जारी लड़ाई के चलते उनका ग्रुप छिन्न-भिन्न हो जाता है. कुछ साथी इंडिया आकर छुप जाते हैं. तो बाकी लंदन में शरण ले लेते हैं. उधर, इन सब बातों से बेखबर श्रीकांत तिवारी टास्क छोड़ चुका है. एक टिपिकल कॉर्पोरेट जॉब में अपना 9 टू 5 का वक्त बीता रहा है. श्रीकांत और बागी तमिल ग्रुप  के अलावा कहानी का तीसरा पहलू भी है. वो है ISI एजेंट मेजर समीर. समीर फिर एक्टिव हो चुका है. इंडिया पर बड़ा हमला करने की ताक में हैं.

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श्रीकांत की दुनिया बदल जाती है. फोटो – यूट्यूब

एक गलतफहमी की वजह से मेजर समीर और ये बागी ग्रुप साथ हो जाते हैं. अब दोनों का एक ही मकसद है. इंडिया पर ऐसा हमला करना कि एक मैसेज भेजा जा सके. अपने मकसद में कामयाब हो पाएंगे या नहीं, उधर उन्हें रोकने के लिए टास्क क्या करेगा, यही शो का प्लॉट है. ये सिर्फ शो का प्लॉट है. साथ ही कहानी में इतने सब-प्लॉट खुलेंगे कि आपका ध्यान बंटने नहीं देंगे. ये सारे सब-प्लॉट लास्ट में आकर कैसे कहानी को जस्टिफाई करते हैं, वो भी देखने लायक है.


# The Family Man 2 में क्या अच्छा था?

# ‘द रियल फैमिली मैन’

सबसे पहले बात कहानी के मुख्य किरदार श्रीकांत तिवारी की. श्रीकांत के लिए टास्क उसका प्लेग्राउंड था. मिशन पर हालात कितने भी मुश्किल हो जाते थे, वो उनसे पार पाने का तरीका निकाल ही लेता था. कुल मिलाकर कहें तो टास्क श्रीकांत का कम्फर्ट ज़ोन था. इस सीज़न में ये कम्फर्ट ज़ोन उससे छीन लिया गया. वो यहां बना एक ‘रियल फैमिली मैन’. बच्चों को स्कूल छोड़ना, बीवी का बर्थडे याद रखना, फैमिली के साथ पूरा वक्त बिताना. ये सब करने के बावजूद श्रीकांत की लाइफ परफेक्ट नहीं. बच्चे क्या कर रहे हैं, उसे नहीं बताते. बीवी ठीक से बात नहीं करती, उसकी तरफ करवट कर सोना तक पसंद नहीं करती. ऐसी बातें श्रीकांत को खाए जाती हैं. कि सब कुछ करने के बावजूद भी कमी कहां छूट रही है. अपनी ये विवशता, ये बेचैनी वो दुनिया को गा-गाकर नहीं सुनाता. बस आप उसकी थकान भरी आखों में ये सब पढ़ लेते हैं. नसीरुद्दीन शाह ने कभी कहा था कि हम रोने, चिल्लाने को ही एक्टिंग समझते हैं. यहां श्रीकांत न रोया, न चिल्लाया. फिर भी आपको उसके लिए बुरा महसूस होगा. श्रीकांत के ऐसे पोर्टरेयल के लिए तारीफ होनी चाहिए मनोज बाजपेयी की. वैसे उनकी एक्टिंग किसी वैलिडेशन की मोहताज नहीं, फिर भी मनोज जी, गर्दा उड़ा दिए कसम से.

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श्रीकांत को उसके कंफर्ट ज़ोन से बाहर आता देखना रिफ्रेशिंग था. फोटो – यूट्यूब

लेकिन श्रीकांत अकेला नहीं है जो आंतरिक मतभेद से जूझ रहा है. कुछ ऐसा ही हाल उसकी बीवी सुचित्रा का भी है. मन में एक बात दबाए अपने दिन काट रही है. उसका एक सच है जो उसे खाए जा रहा है. सुचित्रा की इस उलझन को बखूबी तरीके से प्रेजेंट किया है प्रियामणि ने. जिन्होंने शो में श्रीकांत की पत्नी सुचित्रा का रोल निभाया.


# शो हीरो से नहीं, उसके विलन से बनता है

दूसरा फैक्टर जो हमें अच्छा लगा, वो है शो की विलन. राजी. राजी बागी ग्रुप से ताल्लुक रखती है. खतरनाक किस्म की फाइटर है. उसके ऐसा बनने की वजह उसकी पास्ट लाइफ है. जिसे शो में पूरा स्पेस दिया गया है. ऐसा नहीं लगेगा कि बस सीधा राजी को उठाकर फैमिली मैन यूनिवर्स का हिस्सा बना दिया. राजी निडर है. दृढ़ निश्चयी है. अपने मिशन के अलावा उसे किसी और चीज़ से सरोकार नहीं. राजी के अनुभव ऐसे रहे हैं कि एक नज़र में भांप जाती है कि सामने वाला शख्स कितने पानी में है. शो से ही उदाहरण देते हैं.

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राजी एक ट्रेंड फाइटर है जिसे बस अपने मिशन से मतलब है. फोटो – यूट्यूब

सीज़न 1 का विलन याद कीजिए, मूसा. शातिर था. किसी को अपने प्लान की भनक तक नहीं लगने दी. श्रीकांत जब उससे नेगोशिएट करने जाता है तो अपनी मां की झूठी कहानी सुनाता है. मूसा उसके झांसे में आ जाता है. कट टू सीज़न 2. यहां भी एक मौके पर श्रीकांत राजी से बात करना चाहता है. उसे अपनी मनगढ़ंत कहानी सुनाता है. राजी इसके बाद उसे अपनी एक कहानी सुनाती है. और कहती है,

फर्क ये है कि तुम्हारी कहानी झूठी है और मेरी सच्ची.

श्रीकांत चुप हो जाता है. ऐसी है राजी. सामने वाले को सोचने पर मजबूर कर दे. राजी का रोल निभाया है समांथा अक्किनेनी ने. सिर्फ राजी के लुक्स या एक्शन सीन्स से उसे खतरनाक नहीं बनाया. बल्कि, जिस तरह से समांथा अपने आप को कैरी करती हैं, वो काबिल-ए-तारीफ है.


# ट्रैजडी में भी कॉमेडी ढूंढने वाली राइटिंग

शो का तीसरा बेस्ट पॉइंट है उसका एफर्टलेस ह्यूमर. जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, शो डार्क होता जाता है. लेकिन शो अपनी ट्रैजडी में भी ह्यूमर निकाल लाता है. और ऐसा करने के लिए स्ट्रगल करते हुए नहीं दिखता. माने उस टूथपेस्ट की ट्यूब की तरह नहीं, जिसे पिचका-पिचकाकर आखिरी बूंद निकालने की कोशिश की जाती हो. बिल्कुल एफर्टलेस. जैसे इस सीज़न में श्रीकांत के बेटे ‘द ग्रेट बांसुरीवादक’ को नया शौक चढ़ जाता है. सम्मोहन करने का. पूरे शो में इसकी रट लगाए रखता है. इसके बाद आती है श्रीकांत और जेके की केमिस्ट्री. दोनों लंगोटिए यार. दोनों के सीन्स स्टैंड आउट करते हैं. टेंशन भरे पलों में रिलीफ देने का काम करते हैं. इसका क्रेडिट मनोज बाजपेयी और शारीब हाशमी के साथ-साथ शो की राइटिंग टीम को भी जाता है. राइटर्स राज एंड डीके, सुमन कुमार और सुपर्ण वर्मा ने नॉर्मल सिचुएशन्स में भी फन निकालने का कुशल काम किया है.

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जेके, श्रीकांत और पाव भाजी – बेस्ट कॉम्बिनेशन. फोटो – यूट्यूब

# ‘हॉलीवुड फिल्म देखे हो? नहीं, लेकिन फैमिली मैन देखे हैं’

एक और पॉइंट है जिसपर बात की जानी जरूरी है. वो है शो के लॉन्ग टेक. यानी बिना कैमरा कट किए लगातार शूट किए गए सीन. शो की शुरुआत ही एक लॉन्ग टेक से होती है. करीब चार मिनट के इस टेक में तमिल बागियों को कहानी में सेटअप किया गया है. कैमरा पूरा वक्त ग्रुप के लीडर के साथ चलता है. मेकर्स ने किस हद तक शो की डिटेलिंग पर काम किया है, उसका आइडिया आपको इस पहले सीन से ही लग जाएगा.

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शो का एक्शन और कैमरा वर्क ऐसा है कि कई हॉलीवुड फिल्मों को पानी पिला दे. फोटो – यूट्यूब

शो में दो और कमाल के लॉन्ग टेक है. एक है शो का सात मिनट का क्लाइमैक्स. इतना धमाकेदार कि याद नहीं आएगा कि आखिरी बार ऐसा क्लाइमैक्स कौनसी वेब सीरीज़ में देखा था. लेकिन अब बात उस लॉन्ग टेक की जो पूरी लाइमलाइट ले गया. शो के छठे एपिसोड में पुलिस स्टेशन पर हमला हो जाता है. पूरे अटैक को इस सीन ने जैसे कैप्चर किया है, उसे एक्स्प्रेस करने के लिए ‘माइंड ब्लोइंग’ जैसा शब्द काफी छोटा है. बस इस सीन के बारे में इतना ही कह सकते हैं कि अगली बार आपका कोई दोस्त कहे कि एक्शन सीन्स तो हॉलीवुड फिल्मों में ही बढ़िया होते हैं. तो उसे कहिएगा, रुको जरा, सब्र करो. और ये सीन देखो. इतनी बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी का क्रेडिट जाता है कैमरन एरिक ब्रायसन को. बस शो के क्रिएटर्स राज एंड डीके के नाम एक रिक्वेस्ट है. कि प्लीज़ इस सीन की मेकिंग रिलीज़ कीजिए.


#शो में क्या अच्छा नहीं लगा?

लिटरली कुछ भी नहीं. शो ज़ीरो वेस्टेज पॉलिसी पर चलता है. माने हर चीज़ सही मात्रा में है. हर डायलॉग, हर किरदार, हर एक सीन. सब आगे जाकर बड़े प्लॉट को सपोर्ट करते हैं. एपिसोड लेंथ बढ़ाने के चक्कर में कहीं भी खींचतान नहीं की गई.

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बांसुरीवादक अब वो बांसुरीवादक नहीं रहे, जो लिबीर लिबीर करते थे. अब इनको चाहिए फुल इज़्ज़त. फोटो – यूट्यूब

शो पर लल्लनटॉप टेक ये है कि इसे किसी भी हालात में मिस मत कीजिए. अगर सीज़न 1 देखा है तो तुरंत सेकंड भी निपटा डालिए.


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