शादी के नाम पर लड़कियों की अदला-बदली करने वाली ये घटिया प्रथा कब खत्म होगी?

0

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

एक लड़की की कुछ समय पहले शादी हुई थी. लेकिन वो शादीशुदा ज़िंदगी में खुश नहीं थी. तलाक लेना चाहती थी, पर समाज के ऊल-जुलूल नियमों की बेड़ियों में जकड़ी हुई थी. उसे डर था कि अगर वो कानूनन तलाक लेती है तो उसके भाई का घर भी बर्बाद हो जाएगा. इसलिए उसने एक फैसला किया, खुद को खत्म करने का फैसला. और कथित तौर पर उसने सुसाइड कर लिया. अपने पीछे एक नोट भी छोड़ा, जिसमें उसने एक प्रथा का ज़िक्र किया और उसे ही अपनी मौत का ज़िम्मेदार ठहराया. इस प्रथा का नाम है ‘आटा-साटा’. आपको इसी प्रथा के बारे में डिटेल में बताएंगे. क्या है ये? कहां-कहां प्रचलित है और इस प्रथा से लड़कियां क्या कुछ सहने पर मजबूर हैं, सब जानेंगे एक-एक करके.

क्या है पूरा मामला?

जिस केस का हमने शुरुआत में ज़िक्र किया, वो राजस्थान के नागौर ज़िले के हेमपुरा गांव का है. ये गांव नांवा पुलिस थाने के तहत आता है. 28 जून को इस गांव में रहने वाली एक लड़की ने कुएं में कूदकर कथित तौर पर सुसाइड कर लिया. घरवालों ने पुलिस को जानकारी दी, फिर शव को कुएं से बाहर निकाला गया. पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. लड़की का नाम सुमन था, 21 बरस की थी. उसकी मौत के बाद उसके चाचा नारुराम नांवा पुलिस थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई. पुलिस को बताया कि सुमन पिछले चार-पांच दिनों से मानसिक तौर पर परेशान थी, इसके चलते कुएं में कूदकर जान दे दी.

‘आज तक’ के मोहम्मद हनीफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. उधर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर सुमन के हाथों लिखा गया एक सुसाइड नोट वायरल हो गया. जिसके बात ‘आटा-साटा’ प्रथा की बात सामने आई. सुमन ने कथित नोट में लिखा कि उसकी मौत का ज़िम्मेदार पर्टिकुलर कोई व्यक्ति नहीं है, बल्कि पूरा समाज है और आटा-साटा प्रथा है. आगे बढ़ने से पहले एक लाइन में इस प्रथा के बारे में जान लीजिए. ये प्रथा राजस्थान में काफी प्रचलित है. इसमें दो घरों के बीच लड़का-लड़की की अदला-बदली होती है. माने अगर घर A की लड़की की शादी घर B के लड़के से हुई, तो घर B की किसी लड़की की शादी घर A के लड़के के साथ होगी. ये एक तरह से डील जैसा होता है. इस पर आगे और बात करेंगे, पहले सुमन के केस के बारे में पूरा जान लीजिए.

सुमन के कथित सुसाइड नोट में लिखा है-

“मेरा नाम सुमन चौधरी है. मुझे पता है सुसाइड करना गलत है, पर सुसाइड करना चाहती हूं. मेरे मरने की वजह मेरा परिवार नहीं, पूरा समाज है, जिसने आटा-साटा नाम की कुप्रथा चला रखी है. इसके कारण लड़कियों को जिंदा मौत मिलती है. इसमें लड़कियों को समाज के समझदार परिवार अपने लड़कों के बदले बेचते हैं. समाज के लोगों की नजरों में तलाक लेना गलत है, परिवार के खिलाफ शादी करना गलत है, तो फिर यह आटा-साटा भी गलत है. आज इस प्रथा के कारण हजारों लड़कियों की जिंदगी और परिवार पूरे बर्बाद हो गए हैं. इस प्रथा के कारण पढ़ी-लिखी लड़कियों की जिंदगी खराब हो जाती है. इसी प्रथा के कारण 17 साल की लड़की की शादी 70 साल के बुजुर्ग से कर दी जाती है. केवल अपने स्वार्थ के लिए.”

नोट में आगे लिखा है-

“मैं चाहती हूं, मेरी मौत के बाद यह मेरी बातें बनाने की जगह, मेरे परिवार वालों पर उंगली उठाने की जगह, इस प्रथा के खिलाफ आवाज उठाएं. इस प्रथा को बंद करने के लिए शुरुआत करनी होगी. हर एक भाई को अपनी बहन की राखी की सौगंध, अपनी बहन की जिंदगी खराब करके अपना घर न बसाएं. आज इस प्रथा के कारण समाज की सोच कितनी खराब हो गई है कि लड़की के पैदा होते ही तय कर लेते हैं कि इसके बदले किसकी शादी करानी है.”

पूरे सुसाइड नोट में सुमन ने आटा-साटा का ज़िक्र किया है, लेकिन ये नहीं बताया कि उसका आटा-साटा किस तरह हुआ. क्या उसके भाई की शादी भी उसी घर में हुई जहां सुमन की हुई थी. इसका ज़िक्र नोट में नहीं है. दरअसल, करीब दो बरस पहले भूणी गांव में एक लड़के से हुई थी. कुछ समय वो ससुराल में रही, फिर उसका पति काम के सिलसिले में विदेश चला गया. उसके बाद सुमन अपने मायके में रहने लगी थी. वो आर्ट्स ग्रेजुएट थी, ब्यूटी पार्लर का कोर्स भी कर रखा था, आगे भी पढ़ना चाहती थी. “दैनिक भास्कर” की रिपोर्ट के मुताबिक, सुमन का पति पहले गांव में बकरियां चराता था और उससे कम पढ़ा-लिखा था. इसी रिपोर्ट के मुताबिक, सुमन की शादी के बाद उसकी दो ननद की लिचाना गांव के दो लड़कों से हुई थी, और इन लड़कों के परिवार की दो लड़कियों की शादी सुमन के भाई से हुई थी.

सुमन का कथित सुसाइड नोट देखकर और सोशल मीडिया पर लिखी जा रही बातों से ये समझ आ रहा है कि सुमन तलाक लेना चाहती थी, लेकिन बाकी शादियों पर इसका असर पड़ेगा, इसके चलते वो ये कदम नहीं उठा पा रही थी.

इस मामले की जांच नांवा SDM ब्रह्मलाल कर रहे हैं. ऑडनारी को उन्होंने बताया-

“हम मामले की जांच Crpc के तहत कर रहे हैं. अभी तक किसी के खिलाफ केस दर्ज नहीं हुआ है और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई है. क्योंकि किसी के ऊपर कोई आरोप नहीं लगे हैं. लड़की के परिवार वालों ने बताया था कि वो कुछ दिनों से परेशान थी, हो सकता है कि इस वजह से ये कदम उसने उठाया हो. रही बात सुसाइड नोट की, तो हमने घर की पूरी तलाशी ली थी हमें ये नोट कहीं नहीं मिला था. वो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तभी सामने आया. इसलिए उस नोट के बारे में भी अभी कुछ कहा नहीं जा सकता, वो भी जांच का विषय है. लड़की का फोन भी हमें मिला नहीं है. हमने शव का पोस्टमार्टम कर लिया है, चूंकि कुएं में ज्यादा पानी था नहीं, इसलिए मौत का कारण कूदने की वजह से चोट लगना सामने आया है. हालांकि हम मामले की जांच कर रहे हैं. रही बात आटा-साटा की, तो लड़की के घरवालों से पूछताछ में पता चला है कि उसके भाई की शादी लड़की की ननद से नहीं हुई थी.”

हालांकि हमने जितने भी पुलिस अधिकारियों से बात की, वो आटा-साटा प्रथा के बारे में बात करने से बचते ही नज़र आए. राजस्थान में रहने वाले कुछ लोगों से हमने बात की, सभी ने हमें ये बताया कि ये प्रथा बरसों से चली आ रही है. मोहम्मद हनीफ ने बताया कि चूंकि राजस्थान के कुछ समाजों में लड़कियों की संख्या कम है, ऐसे में उन्हें अपने बेटों के लिए लड़कियां खोजने में दिक्कत आती है, तब लोग अक्सर आटा-साटा शादी करते हैं. मेन गोल होता है कि बेटे के लिए बहू आ जाए, तब ये नहीं देखा जाता कि बेटी की जिससे शादी करवा रहे हैं, वो लड़का उसके लायक है भी या नहीं. दूसरा, इससे दहेज लेन-देन का टेंशन भी परिवारों को नहीं होता, हालांकि दहेज गैर-कानूनी है, लेकिन आप लोग समझदार हैं, जानते होंगे कि गैर-कानूनी होने के बाद भी कैसे धड़ल्ले से ये चल ही रहा है.

क्यों ये प्रथा सही नहीं?

राजस्थान में विकल्प संस्थान नाम का NGO महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ काम करता है. इस संस्थान से जुड़ी उषा चौथरी से हमारे साथी नीरज ने बात की. उषा बताती हैं कि उनकी संस्थान के पास आटा-साटा के भी कई मामले आते हैं. कुछ मामलों में दो घरों के लड़का-लड़की की अदला-बदली होती है, तो कुछ आटे-साटे काफी कॉम्प्लिकेटेड भी होते हैं. जैसे किसी लड़की की शादी किसी दूसरे परिवार के लड़के से हुई, और उस परिवार की लड़की की शादी, पहली लड़की के चचेरे या ममेरे या फुफेरे भाई से हुई. माने बहुत से मामलों में परिवार के रिश्तेदार भी शामिल हो जाते हैं. उषा बताती हैं कि आटा-साटा प्रथा राजस्थान में आदिवासी समुदाय को छोड़कर लगभग सभी समुदायों में प्रचलित है. कई बार जब लड़कियां छोटी होती हैं, तब ही उनकी सगाई आटे-साटे के तहत सेट कर दी जाती है और बड़े होने पर शादी कर दी जाती है. आटे-साटे में हुई शादी को तोड़ने में बहुत दिक्कत आती है, क्योंकि हमारे देश के अन्य राज्यों की तरह ही राजस्थान में भी जातिगत सिस्टम का जाल फैला हुआ है, जात-पात, समाज को बहुत वैल्यू दी जाती है. ऐसे में अगर कोई लड़की आटे-साटे के तहत हुई शादी तोड़ने का फैसला करती है, तो उसके परिवार को समाज से बहिष्कृत तक कर दिया जाता है, साथ ही उस आटे-साटे में हुई बाकी शादियां भी टूट जाती हैं. इस मुद्दे पर उषा चौधरी ने और भी डिटेल में बताया. कहा-

“ऐसे मामलों में लड़की के समुदाय की जाति पंचायत बैठती है, फिर वो फैसला करती है कि आपने अगर ये रिश्ता तोड़ा है तो फिर बाकी शादियों का रिश्ता भी टूटेगा. पहली ये सज़ा देंगे. दूसरी ये होगी कि कोई भी जाति का व्यक्ति उस परिवार से नहीं मिलेगा, बात नहीं करेगा, न ही खाने वगैरह में या शादी वगैरह में जाएगा. न ही उनके परिवार से बात करेगा. यहां तक कि अगर उस परिवारों में दूसरी कोई बेटियां या अंकल वगैरह हैं, तो वो लोग भी उनसे आकर नहीं मिल सकेंगे. और अगर कोई ये नियम तोड़ता है तो समाज उनको भी जात बाहर कर देगा जो उन परिवारों से बात करेगा. जाति-पंचायत का ये सिस्टम अपने आप में उस प्रथा को बनाए रखता है और बनाए रखना चाहता है. चाहे अत्याचार रहना पड़े, लेकिन उसी परिस्थिति में रहो. आर्थिक दंड देंगे, सामाजिक दंड देंगे और बहिष्कार करेंगे. आर्थिक तो कोई भर भी दे, लेकिन सामाजिक बहिष्कार बड़ा बहिष्कार होता है. तो इसी वजह से हो सकता है कि नागौर वाले मामले में उस लड़की ने ये कदम उठाना उचित समझा कि मेरा मर जाना बेहतर है.”

Usha

उषा आगे बताती हैं कि पुलिस के पास अगर आटा-साटा का कोई मामला पहुंचता है, तो पुलिस एक्शन लेती है, लेकिन मुद्दा ये है कि उनके पास बहुत ही कम लोग जा पाते हैं. क्योंकि लोगों को समाज से बहिष्कृत होने का डर रहता है, उन्हें उसी समाज में रहना होता है, इसी वजह से वो जा नहीं पाते. उषा ने हमें एक अन्य आटा-साटा वाले केस के बारे में भी बताया, जिसमें लड़कियों की शादी बचपन में ही सेट कर दी गई थी, लेकिन उन्होंने बाद में इसका विरोध किया. उन्होंने बताया-

“एक बाल विवाह का मामला आया था पाली डिस्ट्रिक्ट से, उसके अंदर दो लड़कियों का बाल विवाह हो गया था, लेकिन वो वहां जाना नहीं चाहती थीं. लेकिन उन लड़कियों के ससुराल में जो उनकी ननद थी, उसकी शादी लड़कियों के मामा के बेटे से हुई थी. ऐसे भी आटे-साटे होते हैं. बहुत बार सगे भाई-बहन में नहीं होते, दूर के रिलेटिव में हो जाते हैं. तो ये और खतरनाक है, टूटना और मुश्किल होता है. तो उसकी भाभी तो ससुराल में रहती थी, बच्चे भी रहते थे. जब बाल विवाह के खिलाफ आवाज़ उठी, तो जाति-पंचायत आई, नौ लाख रुपए मांगे गए. भाभी भी मायके चली गई, उनके परिवार वालों ने केस कर दिया मामा के लड़के के खिलाफ. कि मेरे पति मुझे मारता है, ननद ये करती है वगैरह वगैरह. फिर हम वहां जाकर खड़े हुए और उस परिवार को सपोर्ट किया. थाने में के कराया. अभी केस चल रहा है.”

इस मुद्दे पर हमारे साथी नीरज ने वकील रितेश शर्मा से भी बात की. वो बताते हैं कि राजस्थान में अदालतों तक आटा-साटा के बहुत ही कम मामले पहुंच पाते हैं. और अभी तक फिलहाल इस प्रथा को लेकर अदालत ने कोई अहम वर्डिक्ट नहीं दिया है. हालांकि आटा-साटा की प्रथा केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है. हरियाणा, मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी इसका चलन है. हालांकि नाम अलग है. कुछ जगहों पर इसे अदला-बदली शादी भी कहते हैं. हम नहीं कह रहे कि कोई प्रथा पूरी तरह से खराब है, लेकिन अगर वो किसी इंसान के मूलभूत अधिकारों का ही हनन कर दे, तो वो बिल्कुल सही नहीं है. अगर आटा-साटा में लड़का और लड़की मर्ज़ी से शादी करते हैं, तो ये भी गलत नहीं है, लेकिन जहां ज़ोर-ज़बरदस्ती आ जाए, तो उसे सही नहीं माना जा सकता.


वीडियो देखें: ऑडनारी शो: कौन हैं वैलेरी बेकू, जिन्होंने पति की हत्या की और कोर्ट ने बरी कर दिया





Source link

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.