RBI ने बता दिया कि देश की GDP और आपको मिलने वाले लोन का आगे क्या मिज़ाज रहेगा

MPC यानी मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने तीन दिन की माथापच्ची के बाद शुक्रवार 4 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई. RBI ने नई मौद्रिक नीति की घोषणा कर दी. कॉन्फ़्रेंस में सबसे बड़ी बात जो निकलकर आई, वो ये कि रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) और बैंक रेट्स में कोई बदलाव नहीं हुआ. आइए बताते हैं, इस फैसले का आपके लिए क्या मतलब है. कॉन्फ़्रेंस की और बाकी बातें भी थोड़े अच्छे से जान लेते हैं.

# रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट

RBI को ‘बैंकों का बैंक’ कहा जाता है. मतलब जैसे हम लोग बैंक से ब्याज़ पर क़र्ज़ लेते हैं. बैंक में पैसे जमा करते हैं ताकि ब्याज़ मिले. ठीक वैसे ही बैंक RBI से पैसे उधार लेते हैं, और वहां पर पैसे जमा करते हैं.

# बैंक जब RBI से पैसे उठाते हैं तो उन्हें RBI को ब्याज़ देना पड़ता है, इस ब्याज़ को ही रेपो रेट कहते हैं.
# बैंक RBI को पैसे दें और उनको इस पर RBI के द्वारा ब्याज़ मिले तो उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.

अब-

# जितनी कम या ज़्यादा ब्याज़ दर पर बैंक्स को RBI से पैसा मिलेगा, उतनी ही कम या ज़्यादा ब्याज़ दर पर बैंक से आम लोगों को उधार मिलेगा.
# RBI में पैसे जमा करने पर जितना कम या ज़्यादा ब्याज़ बैंकों को मिलेगा, हमें भी बैंक में पैसे जमा करने पर उसी हिसाब से कम या ज़्यादा ब्याज़ मिलेगा.

यूं ये कहा ज़ा सकता है कि आप जो लोन बैंक से लेते हैं, उसमें आपको कितना ब्याज़ देना होगा, और आप जो पैसा बैंक में ज़मा करते हैं, उसमें आपको कितना ब्याज़ मिलेगा, ये दोनों चीज़ें काफ़ी हद तक RBI द्वारा निर्धारित रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट पर निर्भर करती हैं. हालांकि ब्याज़ दरें सिर्फ़ रेपो रेट पर ही निर्भर करती हों, ऐसा बिलकुल नहीं है. जैसे लॉन्ग टर्म बॉन्ड यील्ड जैसे कई कारक हैं, जो आपको मिलने वाले पर्सनल या हाउस लोन वग़ैरह की किश्तें तय करती हैं, पर ये कहना बिल्कुल अतिशयोक्ति न होगा कि इन सबमें सबसे बड़ा कारक RBI द्वारा निर्धारित रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट ही होते हैं. तो,

RBI ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके बताया है कि रेपो रेट अगले 2 महीनों के लिए 4 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी रहेगा.

कोरोना महामारी के कारण पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों से निपटने और रिकवरी को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. ब्याज़ की ये दरें (रेपो और रिवर्स रेपो रेट) पिछले छह बार से इतनी ही हैं. अपने न्यूनतम स्तर पर हैं. इससे पहले 22 मई, 2020 की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इनमें बदलाव हुआ था. उस समय रेपो रेट को 40 बेसिस पॉइंट की कटौती के साथ 4 प्रतिशत कर दिया था. 100 बेसिस पॉइंट मतलब एक प्रतिशत. तो साफ़ है कि 22 मई से पहले रेपो रेट 4.40 फ़ीसदी था.

# MPC की तीन दिन की मीटिंग

RBI के गवर्नर ने जो प्रेस कॉन्फ़्रेंस की,  वो तीन दिन की MPC की मीटिंग का निष्कर्ष है. MPC मतलब  ‘मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी’. 6 सदस्यों की एक कमिटी है. इसमें 3 सरकार के और 3 बाहर के लोग होते हैं. हर दो महीने के अंतराल में ये कमिटी मिलती है. भारत के लिए मौद्रिक नीति का निर्धारण करती है. हालांकि इनका मुख्य काम रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट का निर्धारण करना होता है. लेकिन बाज़ार में पैसों की लिक्विडिटी, भविष्य के लिए RBI के लक्ष्यों का निर्धारत करना भी MPC और इनकी मीटिंग का एजेंडा होता है. RBI गवर्नर इसी मीटिंग के बाद सारे फैसले बताते हैं.

# और क्या कहा गया प्रेस कॉन्फ़्रेंस में

# RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ‘समायोजनकारी नीति’ (एकोमोडेटिव पॉलिसी) वाला रुख जारी रहेगा.

# RBI ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए GDP की विकास दर का अनुमान घटाया है. पहले ये 10.50 थी, अब अनुमान है कि ये 9.50 रहेगी.

इसके अलावा, आरबीआई ने मौजूदा वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई दर 5.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है. शक्तिकांत दास ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ने पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है.


वीडियो देखें: खर्चा-पानी: क्या पिछली बार की तरह रेपो-रेट नहीं बदलेगा RBI?





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